छत्तीसगढ़ कस्टम मिलिंग मामला: 140 करोड़ के कथित घोटाले की जांच में ED ने मांगी अहम जानकारी

रायपुर। छत्तीसगढ़ में कस्टम मिलिंग की प्रोत्साहन राशि से जुड़े कथित घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जांच तेज कर दी है। ED ने राज्य सरकार से खरीफ विपणन वर्ष 2021-22 में धान की कस्टम मिलिंग के लिए राइस मिलर्स को दी गई विशेष प्रोत्साहन राशि से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी मांगी थी। राज्य सरकार की ओर से करीब 350 पेज की जानकारी ED को उपलब्ध कराए जाने की बात सामने आई है।

बताया जा रहा है कि ED की जांच का प्रमुख बिंदु कस्टम मिलिंग के लिए दी जाने वाली विशेष प्रोत्साहन राशि में की गई वृद्धि है। पत्र के माध्यम से ED ने जानकारी मांगी है कि खरीफ विपणन वर्ष 2021-22 में राइस मिलर्स को दी जाने वाली विशेष प्रोत्साहन राशि को 40 रुपये से बढ़ाकर 120 रुपये प्रति क्विंटल करने का फैसला किन परिस्थितियों में और किस प्रक्रिया के तहत लिया गया।

आरोप है कि प्रोत्साहन राशि में 80 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि के बाद इसमें से कथित तौर पर 20 रुपये प्रति क्विंटल की दो किस्तों में कुल 40 रुपये मिलर्स से वसूले गए। इसी आधार पर इस मामले में करीब 140 करोड़ रुपये के कथित घोटाले का आरोप लगाया गया है।

मामले की जांच केवल ED तक सीमित नहीं है। ईओडब्ल्यू-एसीबी (EOW-ACB) भी इस प्रकरण की जांच कर रही है। जांच एजेंसियों की कार्रवाई के बीच मामले में कांग्रेस के प्रदेश कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल, मार्कफेड के पूर्व एमडी मनोज सोनी और राइस मिलर चंद्राकर को आरोपी बनाए जाने की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा अनवर ढेबर और अनिल टुटेजा के खिलाफ भी प्रकरण दर्ज होने की बात कही गई है।

अब ED द्वारा राज्य सरकार से मांगी गई करीब 350 पेज की जानकारी के आधार पर कस्टम मिलिंग की प्रोत्साहन राशि बढ़ाने की प्रक्रिया, भुगतान और कथित वसूली से जुड़े पहलुओं की जांच आगे बढ़ने की संभावना है। हालांकि, मामले में लगाए गए आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

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