9वीं कक्षा से ही डेवलप करें स्किल्स लर्निंग, भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार होंगे विद्यार्थी

नई दिल्ली।आज के बदलते दौर में विद्यार्थियों के लिए केवल किताबी ज्ञान ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें भविष्य की जरूरतों के अनुसार विभिन्न कौशलों में दक्ष बनाना भी जरूरी है। इसी को ध्यान में रखते हुए कक्षा 9वीं से ही विद्यार्थियों को स्किल्स लर्निंग यानी कौशल आधारित शिक्षा पर ध्यान देना चाहिए। इससे वे अपनी रुचि और क्षमताओं को पहचानकर भविष्य के लिए बेहतर तैयारी कर सकेंगे।

आलोचनात्मक और रचनात्मक सोच जरूरी

यूनिसेफ के अनुसार, किशोरों के लिए आलोचनात्मक सोच, समस्या समाधान, डिजिटल दक्षता, संचार, सहयोग और भावनात्मक कौशल प्रमुख हैं। वहीं वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की फ्यूचर ऑफ जॉब्स रिपोर्ट 2025 में विश्लेषणात्मक और रचनात्मक सोच, तकनीकी साक्षरता और अनुकूलन क्षमता को महत्वपूर्ण कौशल बताया गया है।

डिजिटल लिटरेसी से लेकर AI तक सीखें

कक्षा 9वीं से विद्यार्थियों को कंप्यूटर की मूल जानकारी के साथ दस्तावेज तैयार करना, प्रेजेंटेशन बनाना, स्प्रेडशीट का उपयोग, ऑनलाइन जानकारी खोजना और डिजिटल सुरक्षा के नियम सीखने चाहिए। इसके अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI के सही और नैतिक उपयोग की समझ भी विकसित करनी चाहिए।

विद्यार्थियों को AI से मिले जवाबों की तथ्य-जांच करना, तकनीक का जिम्मेदारी से उपयोग करना और नई तकनीकों को समझना सिखाया जाना चाहिए।

कम्युनिकेशन और प्रेजेंटेशन स्किल्स पर जोर

अच्छे विचारों को स्पष्ट तरीके से व्यक्त करना भी सफलता के लिए महत्वपूर्ण है। विद्यार्थियों को हिंदी और अंग्रेजी में प्रभावी संवाद, समूह चर्चा, कहानी लेखन, प्रस्तुतीकरण और सार्वजनिक बोलने का अभ्यास करना चाहिए। इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे अपनी बात बेहतर तरीके से रख सकेंगे।

रचनात्मकता और तकनीकी कौशल चुनें

हर विद्यार्थी की रुचि और क्षमता अलग होती है। इसलिए उन्हें अपनी पसंद के अनुसार रचनात्मक या तकनीकी कौशल सीखने का अवसर मिलना चाहिए। ग्राफिक डिजाइन, कोडिंग, लेखन, कला, संगीत और अन्य व्यावहारिक कौशल भविष्य में उपयोगी साबित हो सकते हैं। उद्देश्य केवल करियर चुनना नहीं, बल्कि अपनी रुचि और क्षमता को पहचानना होना चाहिए।

टाइम मैनेजमेंट और फाइनेंस की समझ

विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ समय प्रबंधन, प्राथमिकता तय करना और लक्ष्य के अनुसार समय बांटना सीखना चाहिए। इसके अलावा बचत, बजट, जरूरत और इच्छा में अंतर तथा डिजिटल भुगतान जैसी वित्तीय आदतों की बुनियादी समझ भी विकसित की जा सकती है।

सीखने का सही तरीका

विशेषज्ञों के अनुसार, विद्यार्थियों को एक साथ कई कौशल सीखने के बजाय एक समय में एक कौशल पर ध्यान देना चाहिए। रोजाना 30 से 45 मिनट अभ्यास से शुरुआत की जा सकती है। हर तीन महीने में एक छोटा प्रोजेक्ट तैयार करने से सीखी गई चीजों को व्यवहार में लाने का अवसर मिलेगा।

शॉर्ट कोर्स और लक्ष्य बनाएं

डिजिटल साक्षरता, AI की समझ, विश्लेषणात्मक सोच, रचनात्मकता, संवाद, सहयोग और समय प्रबंधन जैसे कौशल विद्यार्थियों को आगे की पढ़ाई और बदलती दुनिया के लिए तैयार कर सकते हैं। छोटे-छोटे कोर्स और प्रोजेक्ट के जरिए विद्यार्थी अपनी क्षमता को निखार सकते हैं और भविष्य के लिए मजबूत आधार तैयार कर सकते हैं।

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