नई दिल्ली। पैकेज्ड फूड प्रोडक्ट्स पर हेल्थ वार्निंग लेबल को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) से पूछा कि पैकेजिंग पर चेतावनी संबंधी प्रावधान लागू करने में देरी क्यों हो रही है। कोर्ट ने नमक और सोडियम की मात्रा को लेकर प्रस्तावित चेतावनी के संबंध में भी स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने आरोप लगाया कि पहले स्टेकहोल्डर्स के साथ हुई बैठक में FSSAI ने कुछ मुद्दों पर सहमति जताई थी, लेकिन अब उसका रुख बदल गया है। वकील ने अदालत को बताया कि FSSAI ने पहले तय बातों से अलग रुख अपनाते हुए पूरी तरह यू-टर्न ले लिया है।
100 ग्राम और प्रति सर्विंग के आधार पर जांच का सुझाव
मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदर सिंह ने अपनी दलील रखते हुए बताया कि आईसीएमआर की गाइडलाइंस में दो श्रेणियां निर्धारित की गई हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि खाद्य उत्पादों की जांच केवल 100 ग्राम की मात्रा के आधार पर ही नहीं, बल्कि प्रत्येक सर्विंग के आधार पर भी की जानी चाहिए। इससे उपभोक्ताओं को किसी उत्पाद में मौजूद पोषक तत्वों की वास्तविक मात्रा समझने में आसानी होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा- आदेश का अध्ययन करें
सुनवाई के दौरान जस्टिस पारदीवाला ने कहा कि अदालत ने भी इस विषय पर अपने स्तर पर अध्ययन किया है। उन्होंने संकेत दिया कि मामले में आदेश पारित किया जाएगा, जिसे शाम तक या अगले दिन अपलोड किया जा सकता है।
जस्टिस पारदीवाला ने वकीलों से कहा कि वे आदेश का अध्ययन करने के बाद अदालत के समक्ष वापस आएं। साथ ही FSSAI और केंद्र सरकार को भी आदेश को ध्यान से पढ़ने को कहा गया, ताकि अगली सुनवाई में मामले पर स्पष्ट तरीके से चर्चा हो सके।
ज्यादा चीनी, नमक और वसा वाले उत्पादों पर चेतावनी की मांग
यह मामला पैकेज्ड फूड प्रोडक्ट्स पर हेल्थ वार्निंग लेबल से जुड़ा है। याचिका में मांग की गई है कि खाद्य उत्पादों में मौजूद अधिक चीनी, नमक और वसा की मात्रा की जानकारी उपभोक्ताओं को पैकेजिंग पर स्पष्ट और आसानी से समझ आने वाले तरीके से दी जाए।
मामले में अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश और FSSAI व केंद्र सरकार के अगले कदम पर नजर रहेगी।

