जलग्रहण क्षेत्र प्रबंधन योजनाओं को लेकर अहम बैठक, कार्यों की प्रगति पर हुई चर्चा

रायपुर। प्रदेश में जल संरक्षण, भूजल स्तर बढ़ाने और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए जलग्रहण क्षेत्र प्रबंधन की योजनाओं को और प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया है। मंत्रालय महानदी भवन में मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में राज्य जलग्रहण क्षेत्र प्रबंधन एजेंसी की शासी परिषद की नवमीं बैठक हुई। बैठक में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना और जलग्रहण क्षेत्र विकास कार्यक्रम के तहत चल रहे कार्यों की प्रगति की समीक्षा के साथ आगामी योजनाओं को लेकर विस्तार से चर्चा की गई।

मुख्य सचिव ने अधिकारियों को भारत सरकार द्वारा निर्धारित गाइडलाइन के अनुरूप जलग्रहण क्षेत्र प्रबंधन के कार्यों को आगे बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में जलग्रहण परियोजनाओं के तहत अधिक से अधिक भूमिगत जलसंग्रहण और जलसंरक्षण के कार्य कराए जाएं। साथ ही परियोजनाओं में आजीविका से जुड़ी गतिविधियों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर विकसित हो सकें।

जलसंचयन संरचनाओं की प्रगति की समीक्षा

बैठक में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, जलग्रहण क्षेत्र विकास कार्यक्रम के अंतर्गत वर्ष 2021 से अब तक किए गए कार्यों की विस्तृत समीक्षा की गई। पौधरोपण, अमृत सरोवर, स्टापडेम, चेकडेम सहित विभिन्न जलसंग्रहण संरचनाओं की प्रगति पर अधिकारियों से जानकारी ली गई।

अधिकारियों ने बताया कि चेकडेम, स्टापडेम, कुआं, फार्म पॉण्ड, अर्थन डेम, सिंचाई तालाब, डबरी, वृक्षारोपण तथा मृदा एवं नमी संरक्षण से जुड़े कार्यों के चलते प्रदेश में अतिरिक्त सिंचाई रकबे में वृद्धि हुई है। इससे किसानों को सिंचाई की सुविधा मिलने के साथ कृषि गतिविधियों को भी लाभ मिला है।

आजीविका गतिविधियों को बढ़ावा देने पर जोर

जलग्रहण क्षेत्र विकास कार्यक्रमों के तहत ग्रामीणों की आय बढ़ाने के लिए विभिन्न आजीविका गतिविधियों को शामिल करने पर भी बैठक में चर्चा हुई। इनमें डेयरी, मुर्गीपालन, मत्स्य पालन, बकरी पालन, शुकर पालन, बत्तख पालन और मधुमक्खी पालन जैसी गतिविधियां शामिल हैं।

इसके अलावा ड्रिप, स्प्रिंकलर, पंप मोटर, पंप, अगरबत्ती उत्पादन, सब्जी उत्पादन, आटा चक्की, दाल पिसाई मशीन और मसाला पिसाई मशीन जैसी गतिविधियों को भी परियोजनाओं में शामिल करने के संबंध में अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 3.0 पर भी चर्चा

बैठक में वाटरशेड विकास कार्यक्रम-प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 3.0 के प्रारंभिक प्रतिवेदन और प्रस्तावित क्षेत्रफल के अनुमोदन से संबंधित प्रस्ताव पर भी विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों को योजना के निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुरूप प्रस्ताव तैयार करने और जलसंचयन तथा ग्रामीण आजीविका से जुड़े कार्यों को प्रभावी तरीके से आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए।

बैठक में पीसीसीएफ अरूण पाण्डेय, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी, वित्त, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, वन विभाग, ग्रामीण आजीविका मिशन, नाबार्ड, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, केन्द्रीय भूमि जल बोर्ड सहित शासी परिषद के अन्य सदस्य उपस्थित रहे।

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