धर्म, सत्य और आत्मविजय का प्रतीक है दशहरा

दशहरा यानी विजयादशमी भारतीय संस्कृति का महत्वपूर्ण पर्व है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान श्रीराम ने रावण का वध किया था, वहीं मां दुर्गा ने महिषासुर का संहार कर शक्ति और साहस का संदेश दिया था।

दशहरे का सबसे प्रमुख प्रसंग रामायण से जुड़ा है। भगवान श्रीराम की रावण पर विजय यह संदेश देती है कि अधर्म, अहंकार और बुराई कितनी भी शक्तिशाली क्यों न हों, अंततः सत्य और धर्म की ही विजय होती है। वहीं, मां दुर्गा द्वारा महिषासुर के वध की कथा अन्याय और अत्याचार के विरुद्ध संघर्ष का प्रतीक है।

विजयादशमी के अवसर पर देशभर में भगवान श्रीराम और मां दुर्गा की पूजा-अर्चना की जाती है। अनेक स्थानों पर रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतलों का दहन किया जाता है। यह परंपरा बुराई के अंत और अच्छाई की जीत का संदेश देती है।

दशहरा केवल उत्सव मनाने का पर्व नहीं, बल्कि आत्ममंथन का अवसर भी है। मनुष्य को अपने भीतर के अहंकार, क्रोध, लोभ और ईर्ष्या जैसी बुराइयों को दूर करने का संकल्प लेना चाहिए। सत्य, संयम, सदाचार और करुणा को जीवन में अपनाकर ही वास्तविक सफलता प्राप्त की जा सकती है।

वास्तव में, दशहरे का महत्व केवल बाहरी बुराइयों पर विजय पाने तक सीमित नहीं है, बल्कि अपने भीतर की नकारात्मक प्रवृत्तियों पर नियंत्रण करना भी इसका प्रमुख संदेश है। जब मनुष्य अपने आचरण में सत्य, धर्म और सद्भाव को अपनाता है, तभी विजयादशमी की भावना सार्थक होती है। यही इस पर्व का शाश्वत संदेश है।

nikettamrakar
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