रायपुर। छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के बीच सड़क कनेक्टिविटी बेहतर बनाने के लिए रायपुर–लखनादौन इकोनॉमिक कॉरिडोर बनाने की योजना है। करीब 310 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार होने की जानकारी सामने आई है। 10 अक्टूबर 2026 की मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने परियोजना की DPR तैयार कर ली है। इसके साथ ही वर्ष 2027 में निर्माण कार्य शुरू होने की संभावना जताई गई है। हालांकि, निर्माण शुरू होने की आधिकारिक तारीख की पुष्टि अभी नहीं हुई है।
19,500 करोड़ रुपये की लागत से बनेगा कॉरिडोर
प्रस्तावित रायपुर–लखनादौन इकोनॉमिक कॉरिडोर करीब 310 किलोमीटर लंबा छह लेन का ग्रीनफील्ड मार्ग होगा। इसकी अनुमानित लागत लगभग 19,500 करोड़ रुपये बताई जा रही है। इस सड़क के बनने से छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के बीच आवागमन आसान होने के साथ व्यापार और परिवहन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
प्रस्तावित मार्ग रायपुर के कुम्हारी से शुरू होकर धमधा, खैरागढ़, लांझी, रजेगांव, बालाघाट और बरघाट होते हुए लखनादौन तक जाएगा। लखनादौन में यह कॉरिडोर राष्ट्रीय राजमार्ग-44 (NH-44) से जुड़ेगा।
रायपुर से जबलपुर और दिल्ली जाना होगा आसान
इस कॉरिडोर के बनने से रायपुर से जबलपुर की यात्रा में लगने वाला समय कम हो सकता है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इस मार्ग से रायपुर से जबलपुर की दूरी लगभग 4 से 4.5 घंटे में तय होने का अनुमान है।
वहीं, लखनादौन से आगे राष्ट्रीय राजमार्ग और अन्य प्रमुख मार्गों के जरिए आगरा-ग्वालियर क्षेत्र तथा यमुना एक्सप्रेसवे की ओर संपर्क बेहतर होने की संभावना है। इससे दिल्ली तक सड़क यात्रा आसान हो सकती है। रिपोर्ट में रायपुर से दिल्ली की यात्रा लगभग 14 से 16 घंटे में पूरी होने का अनुमान भी जताया गया है। हालांकि, यात्रा का वास्तविक समय अंतिम मार्ग, यातायात और सड़क की स्थिति पर निर्भर करेगा।
वन क्षेत्रों से जुड़े अनुमोदन होंगे जरूरी
परियोजना के निर्माण से पहले कई महत्वपूर्ण प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी। कॉरिडोर के कुछ हिस्सों में वन एवं वन्यजीव क्षेत्रों से जुड़े पर्यावरणीय अनुमोदन की जरूरत पड़ सकती है। इसके अलावा भूमि अधिग्रहण, टेंडर जारी करने और निर्माण संबंधी अन्य औपचारिकताएं भी पूरी करनी होंगी।
2027 में निर्माण शुरू होने की संभावना
मीडिया रिपोर्ट में वर्ष 2027 तक निर्माण शुरू होने की संभावना जताई गई है। हालांकि, परियोजना की अंतिम लागत, निर्माण की आधिकारिक समयसीमा और काम शुरू होने की तारीख की पुष्टि अभी आवश्यक है।
यदि यह परियोजना प्रस्तावित योजना के अनुसार पूरी होती है, तो छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के बीच सड़क संपर्क मजबूत होगा। साथ ही, क्षेत्रीय व्यापार, माल परिवहन और यात्रियों की आवाजाही को भी लाभ मिलने की उम्मीद है।


