बिजली बिल जमा नहीं करने पर बीईओ पर कार्रवाई, पांच वार्षिक वेतन वृद्धियां रोकी गईं

महासमुंद। स्कूल शिक्षा विभाग ने शासकीय राशि के प्रबंधन में लापरवाही बरतने के मामले में सरायपाली के तत्कालीन बीईओ और वर्तमान में सहायक संचालक प्रकाश चंद्र मांझी के खिलाफ बड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की है। शासन ने उनकी दो वार्षिक वेतन वृद्धियां रोकने के साथ ही एक अन्य मामले में तीन वेतन वृद्धियां रोकने का आदेश दिया है। इस तरह उनकी कुल पांच वार्षिक वेतन वृद्धियां रोकी जा चुकी हैं।

मामला शासकीय बिजली बिल के भुगतान से जुड़ा है। वर्ष 2022-23 में बिजली बिल के भुगतान के लिए ₹7,24,173 की राशि का बजट आवंटित किया गया था। यह राशि मार्च 2023 में आहरित भी कर ली गई, लेकिन बिजली विभाग में जमा करने के बजाय लंबे समय तक रोककर रखी गई।

इस मामले में शिकायतकर्ता विनोद कुमार दास ने 17 दिसंबर 2024 को स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी से लिखित शिकायत की थी। शिकायत के बाद कार्रवाई शुरू हुई। जांच और मामले में हुई हलचल के बाद तत्कालीन बीईओ ने करीब दो साल बाद फरवरी 2025 में बिजली विभाग में राशि जमा कराई।

सरकारी राशि समय पर संबंधित विभाग में जमा नहीं करने और वित्तीय प्रबंधन में लापरवाही को शासन ने गंभीरता से लिया है। इसी मामले में प्रकाश चंद्र मांझी के खिलाफ दो वार्षिक वेतन वृद्धियां रोकने की कार्रवाई की गई है।

वहीं, इससे पहले 20 फरवरी 2026 को एक अन्य मामले में उनकी तीन वार्षिक वेतन वृद्धियां रोकने का आदेश जारी किया गया था। इस प्रकार अब तक उनके खिलाफ कुल पांच वेतन वृद्धियां रोकने की कार्रवाई हो चुकी है।

शासन की इस कार्रवाई से यह स्पष्ट संदेश गया है कि शासकीय राशि को निर्धारित समय पर जमा नहीं करना अथवा उसे अनावश्यक रूप से रोककर रखना वित्तीय लापरवाही और कदाचार माना जाएगा। अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि बजट से प्राप्त राशि का निर्धारित उद्देश्य के लिए समय पर उपयोग और भुगतान सुनिश्चित किया जाए।

nikettamrakar
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