बस्तर में सहकारिता का बड़ा आयोजन, पहली बार राष्ट्रीय कार्यशाला में 15 राज्यों की भागीदारी

जगदलपुर। बस्तर में सहकारिता के जरिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती देने की संभावनाओं पर राष्ट्रीय स्तर पर मंथन शुरू हो गया है। जगदलपुर में भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय की ओर से आयोजित दो दिवसीय ‘सहकार से समृद्धि’ राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। कार्यशाला में देश के विभिन्न राज्यों से सहकारिता क्षेत्र के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए हैं।

बस्तर में पहली बार केंद्रीय मंत्रालय के स्तर पर इस तरह की राष्ट्रीय सहकारिता कार्यशाला आयोजित की जा रही है। सम्मेलन में किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के साधन मजबूत करने, स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग करने और रोजगार के नए अवसर विकसित करने जैसे विषयों पर चर्चा हो रही है।

सहकारिता को विकास का माध्यम बनाने पर जोर

कार्यशाला का प्रमुख उद्देश्य सहकारिता आंदोलन को देश के दूरस्थ, आकांक्षी और जनजातीय क्षेत्रों के आर्थिक विकास से जोड़ना है। अधिकारियों द्वारा इस बात पर विचार-विमर्श किया जा रहा है कि सहकारी संस्थाओं के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को किस तरह गति दी जा सकती है और किसानों को अधिक आर्थिक रूप से सक्षम बनाया जा सकता है।

सम्मेलन में सहकारी समितियों की भूमिका, स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने और उपलब्ध संसाधनों के बेहतर व्यावसायिक उपयोग सहित कई महत्वपूर्ण विषयों पर विचार साझा किए जा रहे हैं।

15 राज्यों के सचिव और 14 राज्यों के पंजीयक होंगे शामिल

छत्तीसगढ़ के सहकारिता सचिव डॉ. सी.आर. प्रसन्ना के अनुसार, राष्ट्रीय कार्यशाला में 15 राज्यों के सचिव और 14 राज्यों के सहकारी समितियों के पंजीयक हिस्सा ले रहे हैं। कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों के अधिकारी अपने अनुभव, सफल मॉडल और सहकारिता क्षेत्र में किए जा रहे नवाचारों की जानकारी साझा कर रहे हैं।

डॉ. प्रसन्ना ने कहा कि बस्तर विकास की मुख्यधारा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। सहकारिता के माध्यम से यहां स्थानीय आजीविका को मजबूत करने और आर्थिक गतिविधियों को विस्तार देने की पर्याप्त संभावनाएं हैं। राष्ट्रीय स्तर के इस आयोजन से दूसरे राज्यों के सफल प्रयोगों को समझने और उन्हें आगे बढ़ाने का अवसर मिलेगा।

लघु फिल्म के जरिए दिखाए गए सहकारिता के नवाचार

कार्यशाला की शुरुआत देश के विभिन्न हिस्सों में सहकारिता क्षेत्र में किए जा रहे नवाचारों पर आधारित लघु फिल्म के प्रदर्शन से हुई। फिल्म के माध्यम से सहकारी संस्थाओं की गतिविधियों और स्थानीय स्तर पर उनके प्रभाव को प्रदर्शित किया गया।

इसका उद्देश्य प्रतिभागियों को सहकारिता क्षेत्र में अपनाए जा रहे नए तरीकों से परिचित कराना और अलग-अलग राज्यों की सफल पहलों के बीच अनुभव साझा करने को बढ़ावा देना है।

सहकारी उत्पादों के स्टॉल भी बने आकर्षण

कार्यशाला स्थल पर विभिन्न सहकारी समितियों और संस्थाओं की ओर से उत्पादों के स्टॉल भी लगाए गए हैं। यहां सहकारी संस्थाओं द्वारा तैयार किए गए स्थानीय उत्पादों को प्रदर्शित किया जा रहा है।

इन स्टॉल के जरिए देशभर से पहुंचे अधिकारियों को सहकारी संस्थाओं की गतिविधियों, स्थानीय उत्पादों और उनके संभावित व्यावसायिक अवसरों को करीब से देखने का अवसर मिल रहा है।

बस्तर में सहकारिता के विस्तार पर रहेगा फोकस

दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला में बस्तर समेत जनजातीय और ग्रामीण क्षेत्रों में सहकारिता आधारित विकास को लेकर संभावनाओं पर विशेष चर्चा हो रही है। किसानों की आय बढ़ाने, स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में सहकारी संस्थाओं की भूमिका को अहम माना जा रहा है।

विभिन्न राज्यों से आए अधिकारियों के अनुभव और नवाचारों के आदान-प्रदान से बस्तर में सहकारिता क्षेत्र को विस्तार देने की नई संभावनाएं सामने आने की उम्मीद है।

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