छत्तीसगढ़ में 34 हजार जलस्रोतों की मैपिंग, तैयार हो रहा झरनों और जल निकायों का डेटाबेस

रायपुर। छत्तीसगढ़ में जलस्रोतों और प्राकृतिक झरनों को संरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। केंद्रीय जलशक्ति मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में करीब 34 हजार जल निकायों की आधिकारिक मैपिंग कर उनका डेटाबेस तैयार किया गया है। इसमें प्राकृतिक झरने, जलप्रपात, सोता, तालाब, बांध और जलाशय सहित ग्रामीण क्षेत्रों के विभिन्न जलस्रोत शामिल हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य में दर्ज कुल जल निकायों में से 33,519 यानी करीब 98.6 प्रतिशत जलस्रोत ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित हैं। इसके अलावा 13,647 जलस्रोत नक्सल प्रभावित क्षेत्रों और 12,355 जलस्रोत जनजातीय क्षेत्रों में दर्ज किए गए हैं।

जल संरक्षण की योजना बनाने में मिलेगी मदद

जलस्रोतों की मैपिंग से राज्य में उपलब्ध प्राकृतिक और अन्य जल निकायों की स्थिति को समझने में मदद मिलेगी। इसके आधार पर जल संरक्षण, पुनर्जीवन और प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर प्रबंधन की योजनाएं तैयार की जा सकती हैं।

पर्यटन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मिलेगा लाभ

छत्तीसगढ़ के पहाड़ी और वन क्षेत्रों में मौजूद झरने और जलप्रपात पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण हैं। इनका डेटाबेस तैयार होने से संभावित पर्यटन स्थलों की पहचान और विकास में मदद मिल सकती है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।

हालांकि, पहाड़ी क्षेत्रों में मानसून के बाद कई झरनों का जलस्तर तेजी से घट जाता है। ऐसे में इन प्राकृतिक जलस्रोतों के संरक्षण और जलधारण क्षमता बढ़ाने पर भी विशेष ध्यान देने की जरूरत बताई जा रही है।

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