नई दिल्ली। नेपाल में अचानक आई भीषण बाढ़ के बाद लापता लोगों की पहचान की प्रक्रिया में भारत सरकार मदद करेगी। केंद्र सरकार भारत में रह रहे लापता लोगों के प्रथम श्रेणी के जैविक रिश्तेदारों की डीएनए प्रोफाइलिंग की सुविधा उपलब्ध कराएगी। तैयार डीएनए प्रोफाइल का नेपाल में बरामद अज्ञात शवों से मिले डीएनए प्रोफाइल से मिलान किया जाएगा।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, लापता लोगों के माता-पिता, बेटे-बेटी और भाई-बहन जैसे प्रथम श्रेणी के जैविक रिश्तेदारों के नमूने लिए जा सकते हैं। इन नमूनों की जांच केंद्रीय और राज्य स्तर की फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाओं, राष्ट्रीय फॉरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय (एनएफएसयू) तथा डीएनए जांच की सुविधा वाली एनएबीएल से मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में की जा सकती है।
ऑटोसोमल एसटीआर प्रोफाइल से होगी पहचान
नेपाल पुलिस की सलाह के अनुसार लापता लोगों की पहचान के लिए ऑटोसोमल एसटीआर डीएनए प्रोफाइल तैयार की जा सकती है। डीएनए प्रोफाइल तैयार होने के बाद इसे नेपाली अधिकारियों की ओर से मांगी गई आवश्यक जानकारी के साथ साझा किया जाएगा। इसके बाद नेपाल में मिले अज्ञात शवों के डीएनए से इसका मिलान किया जाएगा।
नेपाल में मृतकों की संख्या 1,259 पहुंची
नेपाल के अधिकारियों के मुताबिक, पिछले सप्ताह आई अचानक बाढ़ में मृतकों की संख्या बढ़कर कम से कम 1,259 हो गई है। बचाव अभियान के दौरान प्रभावित इलाकों से लगातार शव बरामद किए जा रहे हैं। आपातकालीन टीमों ने 12 हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला है, जबकि करीब 5 हजार लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।
भारतीय दूतावास ने साझा की जानकारी
विदेश मंत्रालय ने बताया कि काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास ने मंगलवार को बाढ़ पीड़ितों के शवों की पहचान से जुड़ी जानकारी साझा की थी। इसके बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने भारत में उपलब्ध फॉरेंसिक प्रयोगशालाओं की सेवाएं नेपाल को उपलब्ध कराने का निर्णय लिया।
भारत में तैयार की गई डीएनए प्रोफाइल नेपाली अधिकारियों को ईमेल के माध्यम से भेजी जाएगी। इसके जरिए नेपाल में बरामद अज्ञात शवों की पहचान करने में मदद मिलेगी और लापता लोगों के परिवारों को उनके परिजनों के बारे में जानकारी मिल सकेगी।

