फसल नुकसान,नहीं मिला मुवावजा,किसान परेशान
धमधा –
ग्राम भाठाकोकड़ी में टावर कंपनी की कथित मनमानी एक बार फिर किसानों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बन गई है। आरोप है कि कंपनी ने जबरन किसानों की जमीन पर खुदाई कर खेतों को नुकसान पहुंचाया, लेकिन आज तक प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा नहीं दिया गया।
ग्रामीणों के अनुसार टावर निर्माण के दौरान खेतों में भारी मशीनों से खुदाई की गई और खेतों से निकले बड़े-बड़े बोल्डर व पत्थरों को वहीं डाल दिया गया, जिससे कृषि भूमि की स्थिति खराब हो गई। किसानों का कहना है कि उनकी उपजाऊ जमीन खेती योग्य नहीं रह गई है और फसल उत्पादन पर गंभीर असर पड़ा है। जबकि ट अर कंपनी के द्वारा पूर्व में कहा गया था कि जमीन के9 लेबल कर साफ सुथरा कर के दिया जाएगा।
सबसे बड़ी बात यह है कि इस पूरे मामले में करीब 6 से 7 किसान सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं, लेकिन उन्हें अब तक कोई मुआवजा नहीं मिला। कई किसानों को महज क्षतिपूर्ति के नाम पर कुछ पैसे थमा दिया गया है और कुछ किसान वंचित है। किसानों का आरोप है कि टावर कंपनी के अधिकारी पहले भुगतान का आश्वासन देते रहे, लेकिन अब उनका फोन तक उठाना बंद कर दिया है। मुआवजे के लिए किसानों को लगातार कार्यालयों और अधिकारियों के चक्कर लगवाए जा रहे हैं।
किसानों का दर्द और भी बढ़ गया है क्योंकि पिछले सीजन में धान की फसल खराब हुई, उसके बाद गेहूं और चना की फसल को भी नुकसान झेलना पड़ा। अब धान बोवाई का समय आ चुका है, लेकिन खेतों की बदहाल स्थिति और मुआवजे की अनिश्चितता ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है।
ग्रामीणों का कहना है कि एक तरफ सरकार किसानों की आय बढ़ाने की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ कंपनियों की लापरवाही और प्रशासनिक उदासीनता के कारण अन्नदाता न्याय के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है। प्रभावित किसानों ने प्रशासन से तत्काल जांच कराकर नुकसान का आकलन करने, फसलों की क्षति का मुआवजा दिलाने और टावर कंपनी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
किसानों का सवाल साफ है— आखिर कब मिलेगा नुकसान का मुआवजा और कब रुकेगी टावर कंपनी की मनमानी?
भाठाकोकड़ी के किसान अब आर-पार की लड़ाई के मूड में दिखाई दे रहे हैं। यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो प्रभावित किसान आंदोलन और न्यायालय का रास्ता भी अपना सकते हैं।

