रायपुर। राजधानी रायपुर के टाटीबंध स्थित इस्कॉन रायपुर मंदिर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महा-महोत्सव भक्ति और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय महोत्सव में शामिल हुए। उन्होंने श्री श्री राधा रासबिहारी जी के दर्शन कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना और शंख अभिषेक किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि, खुशहाली और मंगलमय जीवन की कामना की।
मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। पूरा परिसर ‘हरे कृष्ण, हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण, हरे हरे’ के महामंत्र से गूंजता रहा। मुख्यमंत्री साय ने भी भक्तों के साथ महामंत्र का घोष किया और भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य उत्सव पर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। श्रद्धालुओं के उत्साह और भक्तिभाव से पूरा वातावरण कृष्णमय नजर आया।
भगवान श्रीकृष्ण का जीवन देता है कर्तव्य का संदेश
मुख्यमंत्री साय ने जन्माष्टमी के अवसर पर प्रदेशवासियों और श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का संपूर्ण जीवन मानव समाज को धर्म, कर्तव्य और लोककल्याण के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। श्रीमद्भगवद्गीता के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण ने कर्मयोग का जो संदेश दिया, वह आज भी जीवन की चुनौतियों के बीच अपने कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
उन्होंने कहा कि जन्माष्टमी केवल भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य का उत्सव नहीं है, बल्कि उनके जीवन-दर्शन और आदर्शों को आत्मसात करने का भी अवसर है। श्रीकृष्ण ने अन्याय के विरुद्ध खड़े होने, धर्म की रक्षा करने और समाज के कमजोर वर्गों के साथ खड़े रहने का संदेश दिया।
छत्तीसगढ़ की धार्मिक विरासत हमारी अमूल्य धरोहर
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राचीन काल से ही धर्म, अध्यात्म और संस्कृति की पुण्यभूमि रहा है। यह माता कौशल्या का मायका और भगवान श्रीराम का ननिहाल है। प्रदेश के गांवों, नगरों, मंदिरों, तीर्थों और लोक परंपराओं में समृद्ध सांस्कृतिक विरासत आज भी जीवंत है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने, उसका संवर्धन करने और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने के लिए लगातार काम कर रही है। प्रदेश में भोरमदेव, गंधेश्वर महादेव, मधेश्वर महादेव और कुलेश्वर महादेव जैसे शिवधाम हैं। वहीं मां बमलेश्वरी, मां महामाया, माता दंतेश्वरी और मां चंद्रहासिनी जैसे प्रमुख आस्था केंद्र छत्तीसगढ़ की आध्यात्मिक पहचान को समृद्ध करते हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व वाले भोरमदेव मंदिर क्षेत्र को प्रसाद योजना के तहत करीब 150 करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया जा रहा है। इससे धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और आजीविका के अवसर भी बढ़ेंगे।
श्रद्धालुओं को तीर्थ दर्शन कराने पर जोर
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आस्था हमारे समाज की बड़ी शक्ति है और आर्थिक कारणों से कोई भी श्रद्धालु तीर्थ दर्शन से वंचित न रहे, इसके लिए राज्य सरकार विभिन्न योजनाएं संचालित कर रही है।
उन्होंने कहा कि श्रीरामलला दर्शन योजना के माध्यम से प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों से श्रद्धालुओं को अयोध्याधाम की यात्रा कराई जा रही है। अब तक 50 हजार से अधिक श्रद्धालु इस योजना के माध्यम से प्रभु श्रीरामलला के दर्शन कर चुके हैं।
इसी तरह मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के तहत प्रदेश के वृद्धजनों को देश के प्रमुख तीर्थ स्थलों के दर्शन का अवसर उपलब्ध कराया जा रहा है।
धार्मिक पर्यटन से रोजगार के अवसर
मुख्यमंत्री ने कहा कि धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन के विकास से न केवल हमारी विरासत का संरक्षण होता है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलती है। धार्मिक स्थलों पर सुविधाओं के विस्तार से पर्यटन बढ़ता है और स्थानीय युवाओं, स्व-सहायता समूहों, छोटे व्यवसायियों तथा कारीगरों के लिए रोजगार और आय के नए अवसर पैदा होते हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि छत्तीसगढ़ के प्रमुख आस्था केंद्र राष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाएं।
3 से 5 सितंबर तक आयोजित हो रहा महोत्सव
गौरतलब है कि इस्कॉन रायपुर के 26वें वर्ष में प्रवेश के उपलक्ष्य में 3 से 5 सितंबर तक श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महा-महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। महोत्सव के दौरान भगवान श्रीकृष्ण की आराधना, भजन-कीर्तन और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जा रहा है।
कार्यक्रम में राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा, विधायक पुरंदर मिश्रा, इस्कॉन रायपुर के पदाधिकारी, संतजन और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

