सरकारी अस्पतालों में 80% विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी, इलाज के लिए मरीज हो रहे परेशान

छत्तीसगढ़ के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की भारी कमी का मामला सामने आया है। हालात ऐसे हैं कि अस्पतालों में दवाएं तो उपलब्ध हैं, लेकिन मरीजों का इलाज करने के लिए पर्याप्त डॉक्टर नहीं हैं।

 राज्य के सरकारी अस्पतालों में स्वीकृत पदों की तुलना में चिकित्सा विशेषज्ञों की संख्या बेहद कम है। राज्य में चिकित्सा विशेषज्ञों के 2025 पद स्वीकृत हैं, लेकिन इसके मुकाबले सिर्फ 408 विशेषज्ञ ही पदस्थ हैं। यानी सरकारी अस्पतालों में करीब 80 फीसदी विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी बनी हुई है।

सबसे बड़ी चिंता दूर-दराज के जिलों को लेकर है। रिपोर्ट के अनुसार दुर्ग, रायपुर और बिलासपुर जैसे बड़े जिलों में भी विशेषज्ञ डॉक्टरों के पद पूरे नहीं हैं।

स्वास्थ्य विभाग विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए संविदा आधार पर नियुक्तियां करने की लगातार कोशिश कर रहा है, लेकिन इन प्रयासों के बावजूद पर्याप्त सफलता नहीं मिल पा रही है।

नियम के मुताबिक विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति जिला अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में की जानी है। लेकिन पर्याप्त संख्या में विशेषज्ञ नहीं होने के कारण छोटी-छोटी बीमारियों के इलाज के लिए भी मरीजों को बड़े अस्पतालों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी का एक बड़ा कारण मेडिकल कॉलेजों में पीजी की सीटों का कम होना है। वहीं संविदा आधार पर सेवाएं और अन्य राज्यों तथा निजी अस्पतालों की तुलना में कम वेतन भी डॉक्टरों की कमी की एक वजह बताई गई है।

इसके अलावा, संविदा नियुक्ति के प्रयासों के बावजूद कई डॉक्टर नौकरी करने के बजाय दूसरे राज्यों या निजी सेक्टर का रुख कर रहे हैं।

इधर, रायपुर में भी 59 पद रिक्त बताए गए हैं। राजधानी के बड़े सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की जरूरत लगातार बनी हुई है, लेकिन पद रिक्त होने के कारण मरीजों को इलाज के लिए निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है।

यानी सवाल सिर्फ डॉक्टरों की कमी का नहीं, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में विशेषज्ञ सेवाओं की उपलब्धता का भी है।

अब देखना होगा कि सरकार इन रिक्त पदों को कब तक भरती है और मरीजों को सरकारी अस्पतालों में बेहतर विशेषज्ञ उपचार कब तक मिल पाता है।

nikettamrakar
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