धमधा। बारिश की फुहारों के बीच छत्तीसगढ़ की धरती एक बार फिर अपने प्राकृतिक रंगों से लोगों को आकर्षित कर रही है। हरी-भरी घास के बीच सफेद मशरूमों का यह खूबसूरत गुच्छा ऐसा नजर आ रहा है, मानो प्रकृति ने जमीन पर ही सफेद फूलों का गुलदस्ता सजा दिया हो।
छत्तीसगढ़ में बारिश के मौसम के साथ कई तरह के जंगली मशरूम स्थानीय रूप से फुटू, पुटू और खुखड़ी जैसे नामों से जाने जाते हैं। ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों में इनका पारंपरिक रूप से भोजन में इस्तेमाल भी किया जाता है। शोध में भी छत्तीसगढ़ में जंगली मशरूम की कई खाद्य प्रजातियों की मौजूदगी दर्ज की गई है।


लेकिन इस खूबसूरत नजारे के साथ सावधानी भी बेहद जरूरी है। हर जंगली मशरूम खाने योग्य नहीं होता। हाल ही में कोंडागांव में फुटू की सब्जी खाने के बाद एक ही परिवार के आठ लोगों के बीमार होने की खबर सामने आई थी।
इसलिए तस्वीर में दिख रहे मशरूम को केवल देखकर खाने योग्य मानना उचित नहीं है।
प्रकृति का यह अनोखा रूप एक संदेश जरूर देता है—बारिश सिर्फ खेतों और पेड़ों को ही नहीं, बल्कि जंगल और मिट्टी में छिपी प्राकृतिक दुनिया को भी जीवंत कर देती है।
“जिसे किसी माली ने नहीं सजाया, मौसम ने अपने हाथों से खिलाया—घास की गोद में प्रकृति का सफेद गुलदस्ता।”

