मैसूरु। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कर्नाटक के मैसूरु स्थित श्री रामकृष्ण आश्रम में स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक युवा केंद्र ‘विवेक स्मारक’ का उद्घाटन किया। यह केंद्र स्वामी विवेकानंद के विचारों, युवाओं के सशक्तिकरण और भारत की आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत को समर्पित है।
उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मैसूरु भारत की प्राचीन सांस्कृतिक चेतना का प्रमुख केंद्र रहा है। उन्होंने कहा कि यहां के मंदिर, परंपराएं, दशहरा उत्सव, भव्य महल, संगीत और साहित्य देश की समृद्ध विरासत की पहचान हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा, “मैसूरु की सांस्कृतिक विरासत इस शहर के कण-कण में रची-बसी है। यह देखकर संतोष होता है कि शहर ने अपनी इस विरासत को सहेजने और संवारने का कार्य बखूबी किया है। श्री रामकृष्ण आश्रम और स्वामी विवेकानंद की स्मृतियां भी मैसूरु की अमूल्य धरोहर हैं।”
उन्होंने बताया कि कार्यक्रम से पहले उन्होंने उस ऐतिहासिक भवन का भी दौरा किया, जहां स्वामी विवेकानंद अपने प्रवास के दौरान कुछ समय तक रहे थे। प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्रकवि कुवेम्पु सहित कर्नाटक के कई महान विद्वानों का भी रामकृष्ण आश्रम से गहरा संबंध रहा है।
पीएम मोदी ने कहा कि स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक युवा केंद्र यानी ‘विवेक स्मारक’ के उद्घाटन के माध्यम से स्वामी विवेकानंद के मिशन को नया विस्तार मिलेगा। उन्होंने श्री रामकृष्ण आश्रम से जुड़े संतों, विद्वानों और कार्यकर्ताओं को बधाई दी।
इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने विवेक स्मारक पर आधारित एक विशेष फिल्म देखी और रामकृष्ण परमहंस, मां शारदा देवी तथा स्वामी विवेकानंद को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने भगवान शिव मंदिर में पूजा-अर्चना कर देश की समृद्ध आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को नमन किया।
कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने दो महत्वपूर्ण कन्नड़ प्रकाशनों का भी लोकार्पण किया। इनमें महर्षि वाल्मीकि की रामायण के सात खंड तथा स्वामी चेतनानंदजी की पुस्तक “स्टोरीज़ ऑफ वेदांत मॉन्क्स” के कन्नड़ अनुवाद “बडुक्कु वेदुकु” का विमोचन शामिल है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वामी विवेकानंद के विचार आज भी देश के युवाओं को राष्ट्र निर्माण और मानव सेवा के लिए प्रेरित कर रहे हैं तथा ‘विवेक स्मारक’ आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का केंद्र बनेगा।

