दुर्ग के सरकारी स्कूलों में घट रही छात्रों की संख्या, 7 साल में 13,602 विद्यार्थी कम

दुर्ग। जिले के सरकारी स्कूलों से विद्यार्थियों का मोहभंग होने की स्थिति सामने आई है। पिछले सात वर्षों में सरकारी स्कूलों में दर्ज विद्यार्थियों की संख्या 13,602 घट गई, जबकि इसी अवधि में निजी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ी है। शिक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2018-19 की तुलना में वर्ष 2025-26 में सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या 1,62,691 से घटकर 1,49,089 रह गई है।

वर्ष 2018-19 में जिले में प्राथमिक, माध्यमिक, हाई और हायर सेकेंडरी को मिलाकर कुल 1,748 स्कूल थे। इनमें 1,103 सरकारी और 595 निजी स्कूल शामिल थे। उस समय सरकारी स्कूलों में 1,62,691 तथा निजी स्कूलों में 1,94,422 विद्यार्थी दर्ज थे।

वहीं वर्ष 2025-26 में स्कूलों की कुल संख्या घटकर 1,727 हो गई। सरकारी स्कूलों की संख्या 1,105 और निजी स्कूलों की संख्या बढ़कर 622 हो गई। इस दौरान सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या 1,49,089 रह गई, जबकि निजी स्कूलों में यह संख्या बढ़कर 1,95,682 पहुंच गई।

निजी स्कूलों की ओर बढ़ रहा रुझान

विशेषज्ञों के अनुसार सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या घटने के पीछे कई कारण हैं। सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी, एक शिक्षक पर अधिक विद्यार्थियों का भार, जर्जर स्कूल भवन, बालिकाओं के लिए पर्याप्त शौचालय की व्यवस्था का अभाव और अभिभावकों का अंग्रेजी माध्यम एवं बेहतर सुविधाओं वाले निजी स्कूलों की ओर बढ़ता रुझान इसके प्रमुख कारण माने जा रहे हैं।

विशेषज्ञ डॉ. डीपी शर्मा, पूर्व प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, कल्याण पीजी कॉलेज भिलाई के अनुसार सरकारी स्कूलों में पढ़ाई की गुणवत्ता और संसाधनों को मजबूत करने की आवश्यकता है। दूसरी ओर निजी स्कूलों में बेहतर सुविधाएं, प्रयोगशालाएं और अंग्रेजी माध्यम की पढ़ाई अभिभावकों को आकर्षित कर रही है।

सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता सुधारना जरूरी

सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की घटती संख्या शिक्षा व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूल भवन, शिक्षकों की उपलब्धता, शैक्षणिक गुणवत्ता, स्वच्छता और आवश्यक संसाधनों में सुधार के साथ अभिभावकों का विश्वास फिर से सरकारी स्कूलों की ओर बढ़ाया जा सकता है।

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