​”पुत्रादिच्छेत् पराजयम्” संस्कृत विद्यालय में गुरु पूर्णिमा पर विशेष

धमधा— ऊँ सांई संस्कृत विद्यालय धमधा अपनी संस्कृति की रक्षा के लिए तत्परता व्यास जी के मान-सम्मान को आगे बढ़ाने की दृष्टि कोण से बच्चों को संस्कारित किए जाने के उद्देश्य से विद्यालय में गुरु पूर्णिमा मनाया गया।
विद्यालय प्रधानाचार्य नीतू साहू ने कहा कि पहला गुरु केवल माता पिता ही नहीं अपितु बच्चे भी होते हैं माता पिता के पहला गुरु ।​

“पुत्रादिच्छेत् पराजयम्”
व्यक्ति जीवन में हर जगह विजय चाहता है, लेकिन केवल अपनी संतान से अपनी पराजय (आगे निकल जाना) चाहता है।दत्तात्रेय जी के 24 गुरु: भगवान दत्तात्रेय ने प्रकृति, पशु-पक्षियों और यहाँ तक कि एक छोटे बच्चे को भी अपना गुरु माना था क्योंकि उसने उन्हें एकाग्रता और मासूमियत सिखाई। संगीत

आचार्य धर्मेंद्र ताम्रकार ने कहा कि प्रह्लाद और हिरण्यकश्यप: बालक प्रह्लाद ने अपने पिता को ईश्वर-भक्ति और सत्य का सबसे बड़ा मार्ग दिखाया था। आचार्य पंडित देवेन्द्र शर्मा ने कहा कि “सीख जहाँ से भी मिले, वह पावन स्थान है,
संतान अगर राह दिखाए, तो वह भी गुरु समान है।”​गुरु पूर्णिमा के दिन जहाँ हम अपने दीक्षा गुरुओं, माता-पिता और शिक्षकों का आभार व्यक्त करते हैं, वहीं अपने बच्चों के प्रति भी कृतज्ञ होने का दिन है कि उन्होंने हमें:
​एक ‘माता’ और ‘पिता’ का दर्जा दिया।

हमारे भीतर की ममता, करुणा और ज़िम्मेदारी को जगाया। ​हमें जीवन को एक नए नज़रिए से देखना सिखाया।
कार्यक्रम में पुकेशवरि,दुर्गा देवांगन, महेश्वरी, कुसुम, मनीषा,पंडित देवेन्द्र शर्मा,
नवकेश,लूमेश निर्मलकर सहित अभिभावकगण उपस्थित थे।

nikettamrakar
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