जेपी नड्डा की टिप्पणी से सियासी हलचल, छात्र आंदोलन पर दिया बड़ा बयान

नई दिल्ली संसद के मानसून सत्र में नीट पेपर लीक और जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई को लेकर बुधवार को राज्यसभा में जोरदार हंगामा हुआ। इस दौरान केंद्रीय मंत्री और सदन के नेता जेपी नड्डा तथा विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के बीच तीखी बहस देखने को मिली।

राज्यसभा में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई और दिल्ली में वामपंथी दल के कार्यालय में पुलिस के प्रवेश का मुद्दा उठाते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि किसी राष्ट्रीय दल के कार्यालय में पुलिस का प्रवेश लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है और इस मामले की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।

इससे पहले माकपा सांसद जॉन ब्रिटास ने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस की टीम जेएनयू छात्रसंघ की पूर्व अध्यक्ष आइशी घोष को गिरफ्तार करने के लिए पार्टी कार्यालय पहुंची थी। उन्होंने कहा कि आइशी घोष का दोष केवल इतना था कि उन्होंने जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन में हिस्सा लिया था।

इन आरोपों का जवाब देते हुए जेपी नड्डा ने कहा कि वे स्वयं छात्र जीवन में आंदोलन का हिस्सा रहे हैं और आपातकाल के दौरान कई बार गिरफ्तार भी हुए थे। उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस अपनी जिम्मेदारी निभाती है और यदि कोई कानून का उल्लंघन करता है तो कार्रवाई स्वाभाविक है।

नड्डा ने कहा कि “यदि कोई छात्र एक्टिविज्म करता है, तो उसे उसके परिणामों के लिए भी तैयार रहना चाहिए। मैंने भी छात्र आंदोलन के दौरान कई बार गिरफ्तारी झेली है।” उन्होंने पुलिस कार्रवाई का समर्थन करते हुए कहा कि इसे अनावश्यक रूप से सनसनीखेज नहीं बनाया जाना चाहिए।

मामले को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक के कारण राज्यसभा की कार्यवाही पहले दोपहर 12 बजे तक और बाद में दोपहर 2 बजे तक स्थगित करनी पड़ी। विपक्षी सांसदों ने नीट पेपर लीक मामले और छात्र प्रदर्शन पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर गृह मंत्री अमित शाह से सदन में बयान देने की मांग भी दोहराई।

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