हमले की धमकी से मचा हड़कंप, प्लांट्स और पुलों पर सुरक्षा कड़ी; समझौते पर टिकी उम्मीद

वॉशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि ईरान अमेरिका के साथ समझौता नहीं करता, तो अमेरिकी सेना उसके प्रमुख बुनियादी ढांचे, खासकर पावर प्लांट्स और बड़े पुलों को निशाना बना सकती है। एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि जरूरत पड़ने पर अमेरिका सैन्य कार्रवाई से पीछे नहीं हटेगा।

ट्रंप ने कहा कि अगर वार्ता विफल रहती है तो सैन्य अभियान दोबारा शुरू किया जा सकता है और अधूरे मिशन को पूरा किया जाएगा। उनके अनुसार, बिजली संयंत्रों और बड़े पुलों जैसे रणनीतिक ढांचों को नुकसान पहुंचने पर ईरान को उन्हें दोबारा तैयार करने में वर्षों लग सकते हैं, जिससे उसकी आर्थिक और सैन्य क्षमता पर गहरा असर पड़ेगा।

हालांकि, ट्रंप ने दावा किया कि उनका उद्देश्य आम नागरिकों को नुकसान पहुंचाना नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि समुद्री पानी को पीने योग्य बनाने वाले डिसेलिनेशन प्लांट्स पर हमला करने की कोई योजना नहीं है, क्योंकि इससे आम लोगों को परेशानी होगी। उन्होंने कहा कि अमेरिका केवल रणनीतिक और सैन्य महत्व के ठिकानों को ही संभावित लक्ष्य मानता है।

इस दौरान ट्रंप ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से जुड़े उन मीडिया दावों को भी खारिज किया, जिनमें कहा गया था कि इजरायल ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी खुफिया जानकारी अमेरिका के साथ साझा करने वाला था। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका पहले से ही ईरान की परमाणु गतिविधियों पर कड़ी नजर रखे हुए है और उसे किसी अतिरिक्त माध्यम से जानकारी लेने की आवश्यकता नहीं है।

ट्रंप ने यह भी कहा कि ऐसे संवेदनशील मामलों में सार्वजनिक बयानबाजी के बजाय समन्वय और कूटनीतिक संवाद अधिक महत्वपूर्ण है। उनके ताजा बयान के बाद एक बार फिर अमेरिका-ईरान संबंधों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

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