धमधा नगर में लगातार बिगड़ती बिजली व्यवस्था अब आम जनता के लिए सबसे बड़ी परेशानी बन चुकी है। वर्षों से चली आ रही बिजली कटौती और अव्यवस्था ने पिछले कई महीनों में विकराल रूप ले लिया है। हालात ऐसे बन चुके हैं कि नगरवासी दिन-रात बिजली की आंख-मिचौली से त्रस्त हैं। एक ओर प्रदेश सरकार द्वारा धमधा नगर पंचायत को नगर पालिका बनाने की घोषणा की जा रही है, वहीं दूसरी ओर नगर की सबसे मूलभूत आवश्यकता बिजली व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई नजर आ रही है।
नगरवासियों का कहना है कि आखिर नगर पालिका बनने का लाभ क्या होगा, जब लोगों को आज भी स्थायी और सुचारु बिजली सुविधा उपलब्ध नहीं हो पा रही है। नगर में रोजाना 20 से 30 बार बिजली बंद होना अब सामान्य बात बन चुकी है। दिन हो या रात, किसी भी समय बिजली गुल हो जाती है और घंटों तक लोग अंधेरे और उमस में परेशान रहते हैं। भीषण गर्मी के इस दौर में बिजली कटौती ने लोगों का जीना दूभर कर दिया है। छोटे बच्चे, बुजुर्ग, मरीज और महिलाएं सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। रातभर लोग गर्मी और मच्छरों के बीच जागने को मजबूर हैं।
सबसे गंभीर समस्या यह है कि बार-बार बिजली आने-जाने से घरों और दुकानों में लगे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण खराब हो रहे हैं। फ्रिज, टीवी, कूलर, पंखे और कंप्यूटर जैसे उपकरणों में खराबी आने से लोगों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। व्यापारियों का कहना है कि बिजली की अनियमितता के कारण उनका व्यापार प्रभावित हो रहा है। दुकानें, ऑनलाइन कार्य, बैंकिंग सेवाएं और छोटे उद्योग तक प्रभावित हो चुके हैं।
धमधा केवल एक नगर नहीं बल्कि आसपास के लगभग 75 गांवों का प्रमुख केंद्र है। यह क्षेत्र साप्ताहिक बाजार, व्यापारिक गतिविधियों और त्रिमूर्ति महामाया की नगरी के रूप में प्रसिद्ध है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में ग्रामीण क्षेत्र के लोग खरीदारी और अन्य कार्यों के लिए धमधा पहुंचते हैं। ऐसे महत्वपूर्ण नगर में यदि मूलभूत बिजली व्यवस्था ही चरमरा जाए तो विकास के दावों पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
लगातार प्रकाशन, लेकिन विभाग के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही
धमधा की बदहाल बिजली व्यवस्था को लेकर आए दिन समाचार पत्रों और स्थानीय माध्यमों में खबरें प्रकाशित हो रही हैं। नगरवासी लगातार अपनी समस्या उठा रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद विद्युत विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यशैली में कोई सुधार दिखाई नहीं दे रहा है। विभाग की ओर से हर बार वही पुराने जवाब दिए जाते हैं — “मेंटेनेंस चल रहा है” और “लोड बढ़ गया है।”
नगर संवाददाता द्वारा दुर्ग जिला विद्युत विभाग के अधिकारियों से संपर्क करने पर भी स्पष्ट जवाब नहीं मिल पाता। अधिकारी अक्सर अतिरिक्त अभियंता और जूनियर अभियंता का हवाला देकर जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डालते नजर आते हैं। इससे यह साफ दिखाई देता है कि विभाग के भीतर जवाबदेही की कमी है और आम जनता की परेशानियों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा।
नगरवासियों का कहना है कि यदि वास्तव में नियमित मेंटेनेंस किया जा रहा है तो फिर वर्षों से समस्या जस की तस क्यों बनी हुई है? आखिर कब तक लोग “लोड बढ़ गया” और “मेंटेनेंस चल रहा है” जैसे बहाने सुनते रहेंगे? जनता का आरोप है कि विभाग केवल औपचारिकता निभा रहा है जबकि स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस प्रयास दिखाई नहीं देता।
शिकायत व्यवस्था भी पूरी तरह लचर
बिजली बंद होने के बाद सबसे बड़ी समस्या यह होती है कि लोग अपनी शिकायत आखिर कहां दर्ज कराएं। नगरवासियों का कहना है कि विभाग की ओर से कोई सक्रिय और भरोसेमंद शिकायत नंबर उपलब्ध नहीं है। कई बार अधिकारी फोन तक नहीं उठाते और यदि फोन रिसीव होता भी है तो संतोषजनक जवाब नहीं मिलता।
आम लोगों का आरोप है कि विभाग जनता की समस्याओं को सुनने के बजाय जिम्मेदारी टालने में अधिक व्यस्त नजर आता है। इससे लोगों में विभाग के प्रति नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है।
बिजली नहीं, लेकिन बिल पूरा
एक ओर नगरवासी लगातार बिजली संकट से जूझ रहे हैं, दूसरी ओर हर महीने आने वाले भारी-भरकम बिजली बिलों ने मध्यम वर्गीय परिवारों की कमर तोड़ दी है। लोगों का कहना है कि जब पर्याप्त बिजली मिल ही नहीं रही तो आखिर इतने अधिक बिल किस आधार पर वसूले जा रहे हैं।
कई उपभोक्ताओं ने अधिक बिल आने और गलत रीडिंग की शिकायत भी की है। लोगों का कहना है कि विभाग उपभोक्ताओं से समय पर बिल वसूलने में तो पूरी सख्ती दिखाता है, लेकिन सुविधा देने के मामले में पूरी तरह लापरवाह बना हुआ है।
नगरवासियों में बढ़ रहा आक्रोश
लगातार बढ़ती परेशानी के कारण अब नगरवासियों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। लोगों का कहना है कि यदि जल्द ही बिजली व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया तो आने वाले समय में बड़ा जनआंदोलन खड़ा हो सकता है।
जनता सवाल पूछ रही है कि क्या नगर पालिका बनने के बाद भी धमधा की जनता इसी तरह अंधेरे और अव्यवस्था में जीवन बिताने को मजबूर रहेगी? क्या जिम्मेदार अधिकारी कभी धरातल पर उतरकर जनता की वास्तविक समस्याओं को समझेंगे?
अब लोगों को केवल आश्वासन नहीं बल्कि स्थायी समाधान चाहिए। विद्युत विभाग को जवाब देना होगा कि आखिर वर्षों से चली आ रही इस गंभीर समस्या का समाधान कब होगा और धमधा की जनता को राहत कब मिलेगी।
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बार-बार बिजली कटने से व्यापार प्रभावित हो रहा है, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण खराब हो रहे हैं और छोटे व्यापारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। यदि आने वाले दिनों में बिजली व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो व्यापारी वर्ग इस बदहाल व्यवस्था के खिलाफ आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा।”
— आकाश पारख, अध्यक्ष व्यापारी संघ धमधा
डबल इंजन की सरकार में पहली बार ऐसा देखने को मिल रहा है कि सत्ता पक्ष के लोग ही बिजली की बदहाल व्यवस्था को लेकर ज्ञापन सौंपने मजबूर हैं। यह भाजपा सरकार की बड़ी नाकामी है।” आने वाले दिनों में बिजली व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो काांग्रेस इस बदहाल व्यवस्था के खिलाफ आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा।”
— राजीव गुप्ता, जिला प्रभारी महामंत्री कांग्रेस दुर्ग
बिजली विभाग की लापरवाही के कारण आज पूरा नगर परेशान है। बार-बार बिजली बंद होने से आम जनता, व्यापारी और किसान सभी प्रभावित हो रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी केवल औपचारिकता निभाने में लगे हैं। यदि अधिकारी मुख्यालय में रहकर जिम्मेदारी के साथ कार्य करें तो काफी हद तक व्यवस्था में सुधार हो सकता है।”
— रमनलाल यादव, पूर्व अध्यक्ष नगर पंचायत धमधा

