सर्वपितृ अमावस्या के निमित्त संत श्री आशारामजी बापू आश्रम, बेमेतरा में सैंकड़ो श्रद्धालुओं ने विद्वान ब्राह्मणों द्वारा अपने पितरों का श्राद्ध व तर्पण किया। हर श्रद्धालु भावविभोर होकर प्रत्येक वैदिक श्राद्ध विधि को कर रहा था और सबने पितरों की सदगति के लिए दिव्य संकल्प भी किया। यह जानकारी देते हुए सोनू साहू युवा सेवा संघ बेमेतरा नें बताया। श्राद्ध तर्पण के प्रारंभ में श्री विष्णुसहस्त्रनाम और गीता का पाठ एवं भगवन्नाम जप आदि किया गया। पूज्य बापूजी की पावन प्रेरणा से माता-पिता जीवित होते हैं, तो उनके सम्मान और प्रेम में मातृ-पितृ पूजन दिवस तो मनाते ही हैं। उनके शरीर छूटने पर भी सनातन वैदिक पद्धति से उनके लिए प्रति वर्ष सर्वपितृ अमावस्या पर सभी आश्रमों में सामूहिक श्राद्ध तर्पण कर्म किया जाता है। इस अवसर पर देश के लिए कुर्बान हुए शहीदों, धर्म-संस्कृति की सेवा में जीवन लगानेवाले पुण्यात्माओं व अन्य सभी आत्माओं की तृप्ति के साथ प्राणिमात्र के मंगल तथा विश्वशांति हेतु भी तर्पण किया। ‘वराह पुराण’ के अनुसार एक बार पितरों ने ब्रह्माजी के चरणों में निवेदन किया। भगवन् ! हमें जीविका देने की कृपा कीजिये, जिससे हम सुख प्राप्त कर सकें। प्रसन्न होते हुए भगवान ब्रह्माजी ने उन्हें वरदान देते हुए कहा : “अमावस्या की तिथि को मनुष्य जल, तिल और कुश से तुम्हारा तर्पण करेंगे । इससे तुम परम तृप्त हो जाओगे। अत्यंत संतुष्ट होकर यथाशीघ्र वर देना तुम्हारा परम कर्तव्य है।
सर्वपितृ अमावस्या को संत श्री आशाराम जी बापू आश्रम में सैकड़ो श्रद्धालु ने अपनें पितरों का किया श्राद्ध तर्पण

