पाटन। जिले की नगर पंचायत पाटन स्थित आदर्श गौठान इन दिनों गौसेवा और आजीविका के बेहतर उदाहरण के रूप में सामने आया है। यहां लगभग 400 से अधिक मवेशियों को आश्रय देकर उनकी देखभाल की जा रही है। नगर पंचायत अध्यक्ष योगेश ‘निक्की’ भाले के नेतृत्व में महिला स्व-सहायता समूहों और नगर पंचायत के कर्मचारियों द्वारा गौठान का संचालन किया जा रहा है।
दूध उत्पादन से चारा-पानी की व्यवस्था
आदर्श गौठान में गौमाताओं से प्रतिदिन लगभग 11 लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है। उत्पादित दूध का विक्रय कर प्राप्त राशि से मवेशियों के लिए चारा-पानी की व्यवस्था करने में सहयोग मिल रहा है। वर्तमान में खेतों से हरा चारा लाकर मवेशियों को खिलाया जा रहा है, जिससे उन्हें पौष्टिक आहार उपलब्ध हो सके।
नियमित देखभाल से मवेशियों के स्वास्थ्य पर ध्यान
गौठान में मवेशियों को सुबह 8 बजे से दोपहर 3 बजे तक चारा-पानी और सुरक्षित विचरण की व्यवस्था उपलब्ध कराई जा रही है। नियमित देखभाल और हरे चारे की उपलब्धता से मवेशियों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने का प्रयास किया जा रहा है।
वर्मी कंपोस्ट खाद का भी हो रहा उत्पादन
गौसेवा के साथ-साथ गौठान में वर्मी कंपोस्ट खाद का उत्पादन भी किया जा रहा है। इससे जैविक खाद को बढ़ावा देने और गौठान की गतिविधियों को आजीविका से जोड़ने की दिशा में काम हो रहा है। इस तरह गौठान केवल मवेशियों के आश्रय का केंद्र नहीं, बल्कि उपयोगी संसाधनों के उत्पादन का माध्यम भी बन रहा है।
किसानों से पैरादान करने की अपील
नगर पंचायत अध्यक्ष योगेश ‘निक्की’ भाले द्वारा किसानों से आगामी फसल कटाई के बाद खेतों में बचने वाले पैरे को जलाने के बजाय गौठान में दान करने की अपील की जा रही है। इससे मवेशियों के लिए चारे की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिलेगी और पराली के उचित उपयोग को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
पाटन के आदर्श गौठान में गौसेवा, दूध उत्पादन, वर्मी कंपोस्ट खाद निर्माण और महिला समूहों की सहभागिता के जरिए एक बेहतर व्यवस्था विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है। गौठान का यह मॉडल अन्य नगरीय निकायों के लिए भी प्रेरणादायक बन सकता है। व्यवस्थित संचालन और जनसहयोग से गौसेवा को मजबूत बनाने की दिशा में पाटन का आदर्श गौठान एक सराहनीय पहल के रूप में देखा जा रहा है।


