रायपुर। छत्तीसगढ़ में रेल सुविधाओं के विस्तार और यात्री व माल परिवहन को बेहतर बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 10,783 करोड़ रुपये की लागत वाली तीन मल्टीट्रैकिंग रेल परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं से छत्तीसगढ़ समेत पांच राज्यों में रेल नेटवर्क की क्षमता बढ़ेगी।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने केंद्र के इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि इससे विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को नई गति मिलेगी। उन्होंने विशेष रूप से बिलासपुर (उसलापुर)-पेंड्रा रोड तीसरी लाइन और कटनी-पेंड्रा रोड चौथी लाइन को प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण बताया।
बिलासपुर-पेंड्रा रेल कॉरिडोर होगा मजबूत
स्वीकृत परियोजनाओं में बिलासपुर (उसलापुर)-पेंड्रा रोड तीसरी लाइन और कटनी-पेंड्रा रोड चौथी लाइन शामिल हैं। अतिरिक्त रेल लाइनों के निर्माण से इस महत्वपूर्ण रेल कॉरिडोर की क्षमता बढ़ने की उम्मीद है।
इससे ट्रेनों के संचालन को सुगम बनाने, रेल यातायात का दबाव कम करने तथा यात्री और मालगाड़ियों की आवाजाही को बेहतर करने में मदद मिलेगी। इसका लाभ छत्तीसगढ़ के उद्योग, व्यापार और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र को भी मिलने की संभावना है।
656 किलोमीटर बढ़ेगा रेल नेटवर्क
केंद्रीय मंत्रिमंडल से मंजूर तीन परियोजनाओं में खड़गपुर-झारसुगुड़ा (बागदेही) चौथी लाइन, कटनी-पेंड्रा रोड चौथी लाइन और बिलासपुर (उसलापुर)-पेंड्रा रोड तीसरी लाइन शामिल हैं।
इन तीनों परियोजनाओं की कुल अनुमानित लागत 10,783 करोड़ रुपये है। इन्हें वर्ष 2029-30 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। परियोजनाओं के पूरा होने के बाद भारतीय रेलवे के नेटवर्क में करीब 656 किलोमीटर की वृद्धि होगी।
इनका असर पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के 14 जिलों में देखने को मिलेगा। सरकारी अनुमान के मुताबिक करीब 4,790 गांवों और 56 लाख लोगों को बेहतर रेल कनेक्टिविटी का फायदा मिल सकता है।
माल ढुलाई की क्षमता बढ़ेगी
छत्तीसगढ़ खनिज और औद्योगिक संसाधनों के लिहाज से महत्वपूर्ण राज्य है। ऐसे में रेल माल परिवहन की क्षमता बढ़ना उद्योगों के लिए अहम माना जा रहा है। नई मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं से कोयला, सीमेंट, लोहा और इस्पात जैसी वस्तुओं की ढुलाई को अतिरिक्त क्षमता मिलेगी।
तीनों परियोजनाओं के जरिए हर साल करीब 27 मिलियन टन अतिरिक्त माल ढुलाई क्षमता विकसित होने का अनुमान है। इससे लॉजिस्टिक्स और परिवहन व्यवस्था बेहतर होने के साथ निवेश, व्यापार और रोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा मिल सकता है।
पर्यटन और धार्मिक स्थलों को भी फायदा
रेल कनेक्टिविटी बेहतर होने से क्षेत्र के पर्यटन और धार्मिक स्थलों तक पहुंच आसान होने की उम्मीद है। अचानकमार टाइगर रिजर्व, मल्हार का पुरातात्विक स्थल, रतनपुर स्थित मां महामाया मंदिर और खुटाघाट बांध जैसे स्थानों को इसका लाभ मिल सकता है।
बेहतर रेल सुविधा से इन क्षेत्रों में पर्यटकों की संख्या बढ़ने पर स्थानीय कारोबार और रोजगार को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।
पर्यावरण के लिए भी अहम परियोजनाएं
परियोजनाओं को प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अनुरूप तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य यात्री और माल परिवहन को अधिक प्रभावी बनाने के साथ मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स व्यवस्था को मजबूत करना है।
अनुमान के अनुसार इन परियोजनाओं से करीब 12 करोड़ लीटर तेल आयात की बचत और लगभग 62 करोड़ किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी हो सकती है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मंजूरी के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का आभार जताया। उन्होंने कहा कि मजबूत रेल नेटवर्क छत्तीसगढ़ में सुगम आवागमन, औद्योगिक विकास और आर्थिक प्रगति का महत्वपूर्ण आधार बनेगा।

