पीएम मोदी ने दिया संदेश, अपनी परंपराओं और ज्ञान से प्रेरणा लेकर श्रेष्ठ कर्म करने का आह्वान

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक विशेष संस्कृत श्लोक साझा करते हुए जीवन में श्रेष्ठ कर्म, ज्ञान और परंपराओं को आगे बढ़ाने का संदेश दिया। श्लोक के माध्यम से उन्होंने न्यायपूर्ण और प्रकाशमय मार्ग पर चलने तथा समाज में अच्छे गुणों से संपन्न लोगों के निर्माण की प्रेरणा दी।

प्रधानमंत्री ने जो श्लोक साझा किया, वह है—

“तन्तुं तन्वन्रजसो भानुमन्विहि ज्योतिष्मतः पथो रक्ष धिया कृतान्। अनुल्बणं वयत जोगुवामपो मनुर्भव जनया दैव्यं जनम्॥”

इसका भावार्थ है कि मनुष्य को अपनी परंपराओं, संस्कृति और ज्ञान को आगे बढ़ाते हुए श्रेष्ठ कर्म करते रहना चाहिए। व्यक्ति को अपनी बुद्धि से निर्मित न्यायपूर्ण और प्रकाशमय मार्ग पर चलना चाहिए। साथ ही श्रेष्ठ लोगों के सदाचार को अपने जीवन में अपनाते हुए निरंतर विचारशील रहना चाहिए और समाज में अच्छे गुणों से युक्त लोगों के निर्माण में योगदान देना चाहिए।

बुधवार को भी साझा किया था प्रेरणादायक सुभाषित

इससे पहले बुधवार को प्रधानमंत्री की ओर से एक अन्य सुभाषित साझा किया गया था—

“ज्ञानवृद्धाः प्रशंसन्ति शुश्रूषन्तः परस्परम्। विनिवृत्ताभिसन्धानाः सुखमेधन्ति सर्वशः॥”

इसका संदेश है कि ज्ञानी और सज्जन लोग एक-दूसरे का सम्मान करते हैं, सेवा और सद्भाव का व्यवहार रखते हैं। वे व्यक्तिगत स्वार्थ और लाभ की भावना से दूर रहकर एक-दूसरे की सराहना करते हैं और इस तरह जीवन में सुख एवं उन्नति प्राप्त करते हैं।

मंगलवार को संगति और मित्रता का दिया था संदेश

मंगलवार को प्रधानमंत्री ने यह श्लोक साझा किया था—

“उत्तमैः सह साङ्गत्यं पण्डितैः सह सत्कथाम्। अलुब्धैः सह मित्रत्वं कुर्वाणो नावसीदति॥”

इसका भावार्थ है कि अच्छे स्वभाव वाले लोगों की संगति, विद्वानों के साथ सत्संवाद और निःस्वार्थ एवं निर्लोभी लोगों से मित्रता करने वाला व्यक्ति जीवन में निराश या दुखी नहीं होता।

सोमवार को करुणा, संतोष और मेहनत पर दिया जोर

सोमवार को प्रधानमंत्री ने एक अन्य श्लोक के माध्यम से जीवन में करुणा, संतोष, मेहनत और दृढ़ निश्चय का महत्व बताया था।

श्लोक के अनुसार, दूसरों के प्रति करुणा और दया रखने से आत्म-सम्मान बढ़ता है। संतोष के जरिए मनुष्य अपनी तृष्णा पर नियंत्रण पा सकता है। वहीं मेहनत से आलस्य और दृढ़ निश्चय से आशंकाओं पर विजय हासिल की जा सकती है।

प्रधानमंत्री के इन लगातार साझा किए जा रहे सुभाषितों के जरिए भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कार, सदाचार और सकारात्मक जीवन मूल्यों को अपनाने का संदेश सामने आ रहा है।

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