नई दिल्ली। मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स के बढ़ते इस्तेमाल के बीच बच्चों के खेल-कूद और शारीरिक गतिविधियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। अदालत के सामने बच्चों के लिए खेल को शिक्षा की तरह मौलिक अधिकार का दर्जा देने की मांग रखी गई है। मामले में अदालत की ओर से नियुक्त न्याय मित्र ने स्कूलों में रोजाना कम से कम 90 मिनट का समय फ्री प्ले और गेम्स के लिए निर्धारित करने की सिफारिश की है।
खेल को मौलिक अधिकार बनाने की मांग
यह मामला ‘स्पोर्ट्स अ वे ऑफ लाइफ’ एनजीओ के अध्यक्ष और खेल शोधकर्ता डॉ. कनिष्का पांडे की ओर से दाखिल जनहित याचिका से जुड़ा है। याचिका में संविधान के भाग-3 के अनुच्छेद 21ए के तहत बच्चों के लिए खेल को भी शिक्षा की तरह मौलिक अधिकार घोषित करने की मांग की गई है।
याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया है कि पढ़ाई के साथ बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए खेल को भी जरूरी बनाया जाना चाहिए। इसके लिए नर्सरी से लेकर पोस्ट-ग्रेजुएशन तक शैक्षणिक संस्थानों में खेलों को अनिवार्य पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने और स्कूलों के बजट में खेल सुविधाओं के लिए निश्चित राशि निर्धारित करने का सुझाव दिया गया है।
स्कूलों में रोज 90 मिनट का ‘फ्री प्ले’
मामले में सुप्रीम कोर्ट के न्याय मित्र वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकर नारायणन ने अपनी रिपोर्ट में कई अहम सुझाव दिए हैं। उन्होंने सीबीएसई, आईसीएसई और राज्य शिक्षा बोर्डों से जुड़े स्कूलों के दैनिक टाइम-टेबल में कम से कम 90 मिनट का अनिवार्य ‘फ्री प्ले और गेम्स’ समय निर्धारित करने की सिफारिश की है।
रिपोर्ट में बच्चों के बढ़ते स्क्रीन टाइम को भी चिंता का विषय बताया गया है। इसमें कहा गया है कि अगर बच्चों को नियमित रूप से खेल के मैदान से नहीं जोड़ा गया तो उनका ज्यादा समय मोबाइल और अन्य डिजिटल स्क्रीन पर बीत सकता है, जिसका असर उनके शारीरिक और मानसिक विकास पर पड़ सकता है।
बच्चों के लिए मोबाइल में ‘माइनर मोड’ का सुझाव
मामले में बच्चों को डिजिटल दुनिया के संभावित नुकसान से बचाने के लिए मोबाइल फोन में अलग माइनर मोड उपलब्ध कराने का प्रस्ताव भी सामने आया है। इसके तहत माता-पिता बच्चों के फोन में ऐप डाउनलोड को सीमित करने, स्क्रीन टाइम तय करने और देर रात मोबाइल या सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर रोक लगाने जैसे विकल्प इस्तेमाल कर सकेंगे।
इसके अलावा उम्र के हिसाब से ऐप की पहुंच नियंत्रित करने और हानिकारक सामग्री को फिल्टर करने की सुविधा भी प्रस्तावित व्यवस्था में शामिल हो सकती है। हालांकि, पढ़ाई से जुड़े ऐप और आपातकालीन संपर्क जैसी जरूरी सुविधाओं को बंद नहीं किया जाएगा।
22 सितंबर को होगी अगली सुनवाई
इस मामले की पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। अब अदालत ने न्याय मित्र की रिपोर्ट पर याचिकाकर्ता को अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
मामले की अगली सुनवाई 22 सितंबर को होगी। उस दौरान केंद्र सरकार और विभिन्न शिक्षा बोर्डों के रुख पर भी चर्चा होने की संभावना है। फिलहाल यह मामला बच्चों के खेल, स्क्रीन टाइम और डिजिटल सुरक्षा के बीच संतुलन को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

