नई दिल्ली: भारत में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) का तेजी से विस्तार हो रहा है। एक रियल एस्टेट सलाहकार फर्म की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, कर्नाटक और महाराष्ट्र समेत देश के सात प्रमुख राज्य वर्ष 2031 तक करीब 1,380 नए GCC स्थापित करने की तैयारी में हैं। इन केंद्रों के जरिए लगभग 12 लाख नए रोजगार पैदा होने का अनुमान है।
रिपोर्ट के अनुसार, राज्यों की अनुकूल नीतियां, बेहतर बुनियादी ढांचा और निवेश आकर्षित करने के लिए दिए जा रहे प्रोत्साहन भारत में GCC के विस्तार को गति दे रहे हैं। अब ये केंद्र केवल सेवा क्षेत्र का हिस्सा नहीं रह गए हैं, बल्कि राज्यों की अर्थव्यवस्था और रोजगार सृजन के महत्वपूर्ण आधार के रूप में उभर रहे हैं।
GCC को आकर्षित करने में राज्यों के बीच बढ़ी प्रतिस्पर्धा
कर्नाटक, महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात, केरल, हरियाणा और मध्य प्रदेश GCC को अपने-अपने राज्यों में आकर्षित करने के लिए विशेष नीतियों पर तेजी से काम कर रहे हैं। सरकारें कंपनियों को प्रोत्साहन देने के साथ-साथ त्वरित मंजूरी, बेहतर कनेक्टिविटी और आधुनिक बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराने पर जोर दे रही हैं।
इस बढ़ती प्रतिस्पर्धा से देश के वाणिज्यिक रियल एस्टेट बाजार में भी बदलाव देखने को मिल रहा है। GCC के लिए बड़े ऑफिस स्पेस और आधुनिक सुविधाओं की मांग बढ़ने की उम्मीद है।
कर्नाटक और महाराष्ट्र सबसे आगे
रिपोर्ट के मुताबिक, कर्नाटक ने 500 नए GCC स्थापित करने का लक्ष्य रखा है। इससे करीब 3.5 लाख रोजगार पैदा होने की उम्मीद है।
वहीं महाराष्ट्र लगभग 200 नए GCC के जरिए 4 लाख रोजगार के अवसर पैदा करने की योजना पर आगे बढ़ रहा है। रोजगार सृजन के लिहाज से महाराष्ट्र का लक्ष्य सबसे बड़ा बताया गया है।
राजस्थान और गुजरात पर भी नजर
राजस्थान और गुजरात भी GCC निवेश आकर्षित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। दोनों राज्यों ने 200 से 250 से अधिक नए केंद्र स्थापित करने की योजनाएं तैयार की हैं। इसके अलावा केरल, हरियाणा और मध्य प्रदेश भी अपनी विशेष नीतियों और निवेश प्रोत्साहनों के जरिए वैश्विक कंपनियों को आकर्षित करने की कोशिश कर रहे हैं।
युवाओं के लिए बढ़ेंगे रोजगार के अवसर
GCC के विस्तार का सबसे बड़ा फायदा रोजगार के क्षेत्र में मिलने की उम्मीद है। इन केंद्रों में तकनीक, वित्त, रिसर्च, डेटा, इंजीनियरिंग, मानव संसाधन और अन्य पेशेवर सेवाओं से जुड़े हजारों नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि राज्यों की योजनाएं तय समय के अनुसार आगे बढ़ती हैं, तो आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक कंपनियों के लिए केवल बैक-ऑफिस नहीं, बल्कि हाई-वैल्यू सेवाओं और नवाचार का प्रमुख केंद्र बन सकता है।

