नई दिल्ली। सावन का महीना भगवान शिव की पूजा-अर्चना के लिए बेहद खास माना जाता है। मान्यता है कि सावन भगवान भोलेनाथ को अत्यंत प्रिय है। यही वजह है कि इस पूरे महीने श्रद्धालु शिवलिंग पर जलाभिषेक करने के साथ-साथ बेलपत्र भी अर्पित करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बेलपत्र के बिना भगवान शिव की पूजा अधूरी मानी जाती है।
हालांकि, कई बार श्रद्धालु अनजाने में कटे, फटे या टूटे हुए बेलपत्र भी शिवलिंग पर चढ़ा देते हैं। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि पूजा के लिए सही बेलपत्र की पहचान कैसे करें और बेलपत्र तोड़ने के क्या नियम हैं।
पूजा के लिए सही बेलपत्र की पहचान कैसे करें?
बेलपत्र यानी बेल के पेड़ की पत्तियां। आमतौर पर एक बेलपत्र में तीन पत्तियां होती हैं। शिव पूजा के लिए तीन पत्तियों वाला बेलपत्र चढ़ाना शुभ माना जाता है।
- बेलपत्र में तीन पत्तियां होनी चाहिए।
- पत्तियां हरी और ताजी होनी चाहिए।
- पीले, चितकबरे या अधिक धब्बेदार बेलपत्र पूजा के लिए नहीं लेने चाहिए।
- बेलपत्र कटा, फटा या टूटा हुआ नहीं होना चाहिए।
- मुरझाए हुए बेलपत्र को भी पूजा में शामिल करने से बचना चाहिए।
- ऐसा बेलपत्र जिसमें एक पत्ती बहुत बड़ी और बाकी दो पत्तियां असामान्य आकार की हों, उसे भी पूजा के लिए नहीं लेना चाहिए।
बेलपत्र न हो तो क्या करें?
अगर पूजा के समय आपके पास नया बेलपत्र उपलब्ध नहीं है तो परेशान होने की जरूरत नहीं है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पहले से शिवलिंग पर चढ़ाए गए बेलपत्र को उठाकर साफ पानी से धोकर दोबारा भगवान शिव को अर्पित किया जा सकता है।
बेलपत्र तोड़ने के क्या हैं नियम?
शिव पूजा के लिए बेलपत्र तोड़ते समय भी कुछ धार्मिक नियमों का पालन करने की मान्यता है।
सबसे पहले बेल वृक्ष को प्रणाम करें और इसके बाद ही बेलपत्र तोड़ें। मान्यता के अनुसार अष्टमी, नवमी, त्रयोदशी, चतुर्दशी और अमावस्या तिथि को बेलपत्र नहीं तोड़ना चाहिए।
इसके अलावा जब एक तिथि समाप्त हो रही हो और दूसरी तिथि शुरू होने वाली हो, उस समय भी बेलपत्र तोड़ने से बचना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं में सोमवार के दिन बेलपत्र तोड़ना भी वर्जित माना गया है।
भगवान शिव को क्यों प्रिय है बेलपत्र?
बेलपत्र का भगवान शिव की पूजा में विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान भगवान शिव ने जब विष का पान किया था, तब उसके प्रभाव से उनका कंठ जलने लगा। विष के प्रभाव को कम करने के लिए देवी-देवताओं ने भगवान शिव का जलाभिषेक किया और उन्हें बेलपत्र अर्पित किए।
मान्यता है कि बेलपत्र से भगवान शिव को शीतलता मिली और विष का प्रभाव कम हुआ। तभी से बेलपत्र भगवान शिव को प्रिय माना जाने लगा।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन में भगवान शिव को बेलपत्र अर्पित करने से विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती है। शिव पुराण से जुड़ी मान्यताओं में इसे अत्यंत पुण्यदायी बताया गया है।

