रायपुर। रायपुर जिले की समोदा बैराज परियोजना एक बार फिर विवादों में आ गई है। करीब 125 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित इस परियोजना में निर्माण कार्य पूरा होने के कुछ ही वर्षों बाद सुधार और मरम्मत के नाम पर लगभग 50 करोड़ रुपये की अतिरिक्त स्वीकृति दिए जाने का मामला सामने आया है। इसको लेकर वित्तीय अनियमितताओं और निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
शिकायतों के मुताबिक, बैराज के निर्माण के बाद ही इसके कई हिस्सों में तकनीकी खामियां सामने आने लगीं। इसके बाद मरम्मत और सुधार कार्यों के लिए करोड़ों रुपये की अतिरिक्त राशि मंजूर की गई, जिससे पूरे मामले की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
मामले को लेकर अब स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि निर्माण एजेंसी, संबंधित अधिकारियों और गुणवत्ता नियंत्रण की जिम्मेदारी निभाने वाले तंत्र की भूमिका की भी गहन जांच की जानी चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि निर्माण के कुछ वर्षों के भीतर ही इतनी बड़ी मरम्मत की आवश्यकता क्यों पड़ी।
शिकायतों में यह भी कहा गया है कि यदि निर्माण कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप हुआ होता, तो इतनी कम अवधि में करोड़ों रुपये की मरम्मत की जरूरत नहीं पड़ती। ऐसे में परियोजना की गुणवत्ता, निर्माण प्रक्रिया और खर्च की गई सार्वजनिक राशि की जवाबदेही तय करने की मांग की जा रही है।
फिलहाल इस मामले में संबंधित विभाग की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, बढ़ते विवाद के बीच अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार और संबंधित विभाग जांच की मांग पर क्या कदम उठाते हैं।

