नई दिल्ली। केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल ने गुरुवार को महानदी जल विवाद के सौहार्दपूर्ण समाधान के लिए छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के साथ अहम बैठक की। बैठक में जलशक्ति मंत्रालय, केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) और दोनों राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया। इस दौरान संवाद, तकनीकी सहयोग और सहकारी संघवाद के माध्यम से विवाद के समाधान की दिशा में आगे बढ़ने पर सहमति बनी।
बैठक में महानदी जल विवाद के समाधान के लिए चल रहे प्रयासों की समीक्षा की गई। केंद्र सरकार ने कहा कि दोनों राज्यों के बीच तकनीकी स्तर पर बातचीत और सहयोग को बढ़ावा देकर निष्पक्ष और स्थायी समाधान निकालने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है।
गौरतलब है कि महानदी के जल बंटवारे को लेकर लंबे समय से छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच विवाद बना हुआ है। ओडिशा सरकार के अनुरोध पर केंद्र ने 12 मार्च 2018 को अंतर-राज्यीय नदी जल विवाद अधिनियम, 1956 के तहत महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण (एमडब्ल्यूडीटी) का गठन किया था। सभी पक्षों को अपनी बात रखने का अवसर देने के लिए न्यायाधिकरण का कार्यकाल भी बढ़ाया गया है।
बैठक में संयुक्त तकनीकी समिति की प्रगति की भी समीक्षा की गई। केंद्रीय जल आयोग के अध्यक्ष की अध्यक्षता में गठित विस्तारित तकनीकी समिति की पहली बैठक 29 जुलाई 2026 को आयोजित हुई थी, जिसमें दोनों राज्यों के प्रतिनिधियों ने लंबित तकनीकी विषयों पर चर्चा की।
केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल ने कहा कि महानदी दोनों राज्यों के लाखों लोगों के लिए जीवन रेखा है। उन्होंने कहा कि आपसी संवाद, तकनीकी सहयोग और विश्वास के आधार पर ही ऐसा समाधान निकाला जा सकता है, जो निष्पक्ष, टिकाऊ और सभी पक्षों के लिए स्वीकार्य हो।
बैठक के दौरान दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने भी रचनात्मक माहौल में तकनीकी बातचीत को आगे बढ़ाने और विवाद के समाधान के लिए सहयोग जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने जलशक्ति मंत्रालय और केंद्रीय जल आयोग की भूमिका की सराहना की।
बैठक के समापन पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि लक्ष्य केवल मौजूदा विवाद का समाधान करना नहीं, बल्कि महानदी बेसिन के प्रबंधन के लिए एक दीर्घकालिक, निष्पक्ष और टिकाऊ व्यवस्था तैयार करना भी है। उन्होंने विश्वास जताया कि निरंतर संवाद और सहयोग से जल्द ही स्थायी समाधान का रास्ता निकलेगा।

