नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने सोमवार को संसद में E20 पेट्रोल को लेकर बड़ा बयान दिया। सरकार ने कहा कि एथेनॉल मिश्रित E20 पेट्रोल से वाहनों के इंजन को नुकसान पहुंचने का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिला है। इसके उलट E20 ईंधन से बेहतर एक्सेलरेशन, स्मूद राइड क्वालिटी और E10 पेट्रोल की तुलना में करीब 30 प्रतिशत तक कम कार्बन उत्सर्जन होने का दावा किया गया है।
राज्यसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने बताया कि E20 पेट्रोल अधिक स्वच्छ दहन सुनिश्चित करता है, जिससे प्रदूषण कम होता है और शहरी क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता सुधारने में मदद मिलती है। मंत्रालय के अनुसार, एथेनॉल मिश्रित ईंधन से पार्टिकुलेट मैटर (PM) उत्सर्जन लगभग शून्य स्तर तक पहुंच जाता है।
कई संस्थानों ने किए परीक्षण, E20 को बताया सुरक्षित
सरकार ने बताया कि E20 पेट्रोल को लागू करने से पहले कई प्रमुख संस्थानों और वाहन निर्माताओं ने व्यापक परीक्षण किए। इनमें Automotive Research Association of India, Society of Indian Automobile Manufacturers, Indian Oil Corporation Limited और Indian Institute of Petroleum शामिल रहे।
इन परीक्षणों में इंजन की मजबूती, वाहन प्रदर्शन, स्टार्टिंग क्षमता, जंग-रोधी क्षमता, सामग्री की अनुकूलता, उत्सर्जन और ईंधन दक्षता जैसे कई पहलुओं की जांच की गई। सरकार के मुताबिक, सभी परीक्षणों में E20 ईंधन निर्धारित मानकों के अनुसार सुरक्षित पाया गया।
पुराने वाहनों पर भी नहीं मिला नकारात्मक असर
सरकार ने कहा कि पुराने वाहनों पर भी E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से कोई बड़ा प्रतिकूल प्रभाव सामने नहीं आया है। जांच में न तो इंजन में असामान्य घिसावट मिली और न ही जंग या पुर्जों की उम्र कम होने का कोई प्रमाण मिला।
करोड़ों वाहनों के सर्विस रिकॉर्ड का हवाला
सरकार ने अपने दावे के समर्थन में करोड़ों वाहनों के सर्विस रिकॉर्ड का उल्लेख किया। इसके अनुसार, एक प्रमुख वाहन निर्माता कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 में 2.84 करोड़ वाहनों की सर्विसिंग की, जिनमें करीब 1.5 करोड़ वाहन ऐसे थे जो मूल रूप से E20 ईंधन के लिए प्रमाणित नहीं थे। इसके बावजूद E20 के कारण इंजन खराबी या तकनीकी समस्या की कोई बड़ी शिकायत सामने नहीं आई।
इसी तरह, एक अन्य दोपहिया वाहन निर्माता और एक बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनी द्वारा लंबे समय तक किए गए निगरानी अध्ययन में भी E20 ईंधन से इंजन में जंग या किसी गंभीर तकनीकी समस्या का प्रमाण नहीं मिला।
अंतरराष्ट्रीय मानकों के तहत होती है जांच
मंत्रालय ने कहा कि वाहन ग्राहकों तक पहुंचने से पहले अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप कड़े परीक्षणों और सत्यापन प्रक्रियाओं से गुजरते हैं। इन जांचों के जरिए वाहन की सुरक्षा, प्रदर्शन और ईंधन अनुकूलता सुनिश्चित की जाती है।
सरकार का कहना है कि E20 पेट्रोल भारत के स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्य की दिशा में एक अहम कदम है, जिससे पेट्रोल आयात पर निर्भरता कम करने और प्रदूषण घटाने में मदद मिलेगी।

