नई दिल्ली: डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के तहत देश की विधानसभाओं को आधुनिक और पेपरलेस बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘एक देश, एक एप्लीकेशन’ के विजन को आगे बढ़ाते हुए नेशनल ई-विधान एप्लीकेशन (NeVA) को देशभर में तेजी से लागू किया जा रहा है। अब तक 33 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं ने NeVA लागू करने के लिए केंद्र सरकार के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर कर दिए हैं।
संसदीय कार्य राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन ने राज्यसभा में एक लिखित जवाब में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि NeVA परियोजना का उद्देश्य विधायी कार्यों को पूरी तरह डिजिटल बनाना और सदन की कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी, तेज और प्रभावी बनाना है।
673.94 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रहा डिजिटल विधानसभा सिस्टम
सरकार के अनुसार, NeVA परियोजना की कुल लागत 673.94 करोड़ रुपये है, जिसमें केंद्र सरकार का योगदान 423.60 करोड़ रुपये है। अब तक 21 विधानसभाओं को पूरी तरह डिजिटल विधानसभा में बदल दिया गया है।
वहीं, आंध्र प्रदेश विधानसभा के दोनों सदनों में NeVA लागू करने के लिए 23.58 करोड़ रुपये की राशि मंजूर की गई है।
NeVA से होंगे कई बड़े बदलाव
मध्य-अवधि मूल्यांकन रिपोर्ट के अनुसार, NeVA लागू होने से विधायी कामकाज में काफी सुधार आया है। इसके प्रमुख फायदे इस प्रकार हैं—
- विधायी प्रक्रियाओं का पूर्ण डिजिटलीकरण
- कागजी कार्यवाही में भारी कमी
- दस्तावेजों की छपाई, रखरखाव और भंडारण पर खर्च में बचत
- विधायी सूचनाओं तक आसान और तेज पहुंच
- सदन की कार्यवाही की तेज प्रक्रिया और प्रसारण
राज्यों को तकनीकी सहायता भी दे रही सरकार
केंद्र सरकार की सेंट्रल प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट (CPMU) के माध्यम से राज्यों को तकनीकी सहायता और प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जा रहा है। सरकार ने बताया कि NeVA को हर राज्य विधानसभा की जरूरतों और तैयारियों के अनुसार लागू किया जा रहा है।
NeVA परियोजना को डिजिटल इंडिया के तहत संसदीय और विधायी व्यवस्था को पारदर्शी, कुशल और पूरी तरह पेपरलेस बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

