नई दिल्ली। देशभर में पेपर लीक की बढ़ती घटनाओं पर सख्त रुख अपनाते हुए केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 में संशोधन संबंधी विधेयक को मंजूरी दे दी गई। प्रस्तावित संशोधन के तहत पेपर लीक के दोषियों को 10 साल तक की सजा और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। साथ ही ऐसे मामलों की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में होगी, जिसे तीन महीने के भीतर फैसला सुनाना अनिवार्य होगा।
संसद में सोमवार को पेश होगा विधेयक
सरकारी सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह सोमवार को संसद में इस संशोधन विधेयक को पेश करेंगे। सरकार का उद्देश्य पेपर लीक माफिया पर कड़ी कार्रवाई कर परीक्षाओं की पारदर्शिता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करना है।
मौजूदा कानून से और होगा सख्त
फिलहाल पेपर लीक और नकल रोकने के लिए सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 लागू है। वर्तमान कानून में व्यक्तिगत मामलों में 3 से 5 साल की सजा और 10 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। वहीं, सर्विस प्रोवाइडर पर 1 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। संगठित अपराध के मामलों में 5 से 10 साल की सजा और कम से कम 1 करोड़ रुपये के जुर्माने का प्रावधान पहले से मौजूद है।
संशोधन के बाद फास्ट ट्रैक कोर्ट की व्यवस्था अनिवार्य होगी और विभिन्न स्तरों पर दोषियों के लिए अलग-अलग दंड का प्रावधान किया जाएगा। इस कानून के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) के पास होगी।
पीएम मोदी ने दिया था सख्त संदेश
इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को देश को संबोधित करते हुए कहा था कि सरकार पेपर लीक के मामलों को लेकर बेहद गंभीर है और इस संबंध में सख्त कानून लाया जाएगा। उन्होंने कहा कि लाखों छात्रों और उनके अभिभावकों के भविष्य से जुड़ा यह मुद्दा किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि नीट पेपर लीक के आरोप सामने आने के बाद से सरकार लगातार सख्त कदम उठा रही है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि संसद में विधेयक पारित होने के बाद पेपर लीक माफिया के खिलाफ और कठोर कार्रवाई की जाएगी, जिससे परीक्षाओं की निष्पक्षता सुनिश्चित हो सके।

