ट्रंप प्रशासन का नया टैरिफ वार: भारत, बांग्लादेश सहित 17 देशों पर 10% अतिरिक्त शुल्क लागू

नई दिल्ली। वैश्विक व्यापार को प्रभावित करने वाले एक बड़े फैसले में अमेरिका ने भारत सहित 17 देशों से आयात होने वाले कुछ उत्पादों पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लागू कर दिया है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) ने ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 301 के तहत समीक्षा के बाद यह फैसला लिया है। नया शुल्क शुक्रवार से प्रभावी हो गया है।

अमेरिकी प्रशासन के अनुसार, इस कदम का उद्देश्य वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में जबरन श्रम (Forced Labour) से तैयार उत्पादों पर रोक लगाना और अंतरराष्ट्रीय श्रम मानकों को मजबूत करना है।

भारत को मिला राहत वाला स्लैब

शुरुआती आकलनों में भारत पर 12.5 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैरिफ लगाए जाने की संभावना जताई जा रही थी। हालांकि भारत सरकार और अमेरिकी अधिकारियों के बीच हुई बातचीत तथा श्रम मानकों को मजबूत करने के प्रयासों के बाद भारत को 10 प्रतिशत वाले निचले स्लैब में रखा गया। इसे भारतीय निर्यातकों के लिए आंशिक राहत माना जा रहा है।

17 देशों पर लागू हुआ नया शुल्क

भारत के अलावा अमेरिका ने अर्जेंटीना, बांग्लादेश, कंबोडिया, कनाडा, इक्वाडोर, अल सल्वाडोर, ग्वाटेमाला, होंडुरास, इंडोनेशिया, जॉर्डन, मलेशिया, मेक्सिको, पाकिस्तान, श्रीलंका, त्रिनिदाद एंड टोबैगो और ब्रिटेन सहित कुल 17 देशों को इस अतिरिक्त टैरिफ के दायरे में रखा है।

अमेरिकी प्रशासन ने संकेत दिया है कि यदि संबंधित देश जबरन श्रम रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाते हैं, तो भविष्य में और कड़े व्यापारिक प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।

USTR का बयान

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर ने कहा कि वर्षों की कोशिशों के बावजूद वैश्विक सप्लाई चेन से जबरन श्रम पूरी तरह समाप्त नहीं हो पाया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका अब अपने व्यापारिक साझेदार देशों से सख्त श्रम मानकों और प्रभावी निगरानी व्यवस्था लागू करने की अपेक्षा कर रहा है।

भारत ने भी शुरू की तैयारी

भारत सरकार ने भी फोर्स्ड लेबर से जुड़े उत्पादों की पहचान, ट्रैकिंग और निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में कदम तेज कर दिए हैं। सरकार का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय श्रम मानकों का पालन सुनिश्चित करना और भारतीय निर्यात को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाए रखना है।

इन उत्पादों को मिली राहत

अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि सभी भारतीय निर्यात इस अतिरिक्त शुल्क के दायरे में नहीं आएंगे। स्टील, एल्युमिनियम, ऊर्जा उत्पाद, उर्वरक, आवश्यक खाद्य सामग्री तथा USMCA समझौते के तहत आने वाले उत्पादों पर पहले से लागू सेक्टोरल व्यवस्था जारी रहेगी और उन पर नया 10 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लागू नहीं होगा।

क्या होगा असर?

विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले का असर उन भारतीय निर्यातकों पर अधिक पड़ सकता है जिनकी सप्लाई चेन अमेरिकी श्रम मानकों के अनुरूप नहीं है। हालांकि भारत को 12.5 प्रतिशत के बजाय 10 प्रतिशत टैरिफ स्लैब में रखने से संभावित नुकसान कुछ हद तक कम हो सकता है। आने वाले समय में भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक वार्ताओं के आधार पर इस नीति में बदलाव की संभावना भी बनी रहेगी।

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