सुखरी स्टॉप डैम प्रभावित किसानों को अब तक नहीं मिला मुआवजा

किसान बंधु संगठन ने प्रशासन से लगाई गुहार – किसान नेता बाबा टेकसिंह चंदेल

धमधा, दुर्ग। विकासखंड धमधा के ग्राम सुखरीकला के किसानों को वर्ष 2022–23 में बनाए गए स्टॉप डैम निर्माण कार्य का मुआवजा आज तक नहीं मिल पाया है। इस मुद्दे को लेकर किसानों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। किसानों का कहना है कि जल संरक्षण और सिंचाई व्यवस्था को मजबूत बनाने के उद्देश्य से बनाए गए स्टॉप डैम के कारण उनकी कृषि भूमि प्रभावित हुई, लेकिन प्रशासन की ओर से अब तक मुआवजा वितरण की प्रक्रिया पूरी नहीं की गई।

ग्राम के किसानों ने बताया कि निर्माण कार्य के दौरान लगभग 8 किसानों की जमीन एवं फसल प्रभावित हुई थी। प्रशासन द्वारा उस समय मुआवजा दिलाने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन करीब 3 वर्ष बीत जाने के बाद भी किसानों को कोई आर्थिक सहायता प्राप्त नहीं हुई। इससे प्रभावित परिवारों को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

इस मामले को गंभीरता से लेते हुए किसान बंधु संगठन, धमधा ब्लॉक ने अनुविभागीय अधिकारी राजस्व, धमधा को आवेदन सौंपकर जल्द से जल्द मुआवजा दिलाने की मांग की है। संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि किसानों के साथ लंबे समय से अन्याय हो रहा है और यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन करने पर भी विचार किया जाएगा।

इस दौरान किसान नेता बाबा टेकसिंह चंदेल ने कहा कि “किसान देश की रीढ़ हैं, लेकिन आज वही किसान अपने हक और मुआवजे के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं। प्रशासन को चाहिए कि प्रभावित किसानों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए तत्काल मुआवजा वितरण की प्रक्रिया पूरी करे। किसान बंधु संगठन हमेशा किसानों के अधिकारों की लड़ाई मजबूती से लड़ता रहेगा।”

उन्होंने आगे कहा कि “सरकार किसानों की आय बढ़ाने की बात करती है, लेकिन जमीन प्रभावित होने के बाद भी किसानों को उनका हक समय पर नहीं मिलना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो किसान आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।”

किसानों का कहना है कि एक ओर सरकार किसानों की आय बढ़ाने और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत करने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर प्रभावित किसानों को उनका अधिकार समय पर नहीं मिल पा रहा है। किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की जांच कर तत्काल मुआवजा वितरण सुनिश्चित किया जाए।

गांव के किसानों और किसान बंधु संगठन ने उम्मीद जताई है कि प्रशासन उनकी समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए जल्द समाधान करेगा, ताकि प्रभावित किसानों को राहत मिल सके।

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