दुर्ग में ड्यूटी पर तैनात यातायात प्रभारी के साथ अभद्रता, पुलिस मनोबल पर सवाल
निकेत ताम्रकार / दुर्ग।
दुर्ग जिले में एक सामान्य हेलमेट जांच से शुरू हुआ मामला अब कानून व्यवस्था और पुलिस के सम्मान से जुड़ा गंभीर मुद्दा बनता जा रहा है। ड्यूटी पर तैनात यातायात निरीक्षक युवराज साहू के साथ जिस तरह का व्यवहार किया गया, उसने पुलिस विभाग के मनोबल को गहरी ठेस पहुँचाई है।
घटना 7 फरवरी 2026 की बताई जा रही है, जब यातायात प्रभारी अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे थे। इसी दौरान कुछ राजनीतिक कार्यकर्ताओं द्वारा विरोध के नाम पर उन्हें रोककर अभद्र व्यवहार किया गया और कथित रूप से साड़ी और चूड़ियाँ भेंट कर अपमानित करने का प्रयास किया गया। यह घटना न केवल व्यक्तिगत अपमान की श्रेणी में आती है, बल्कि वर्दी और कानून के प्रति खुले तौर पर अवमानना को दर्शाती है।
बताया जा रहा है कि यह पूरा घटनाक्रम उस समय और अधिक तूल पकड़ गया जब इसे शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव द्वारा हेलमेट न पहनकर बाइक चलाने के विवाद से जोड़कर देखा जाने लगा। हालांकि इस संबंध में अंतिम सत्य पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट होगा, लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और तस्वीरों ने माहौल को और भड़का दिया है।
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि ड्यूटी पर तैनात एक पुलिस अधिकारी को जानबूझकर अपमानित करना, कानून व्यवस्था को कमजोर करने जैसा है। ऐसे कृत्य यह संदेश देते हैं कि राजनीतिक दबाव के आगे कानून को झुकाया जा सकता है, जो एक स्वस्थ लोकतंत्र के लिए घातक संकेत है।
इस मामले में अपराध पंजीबद्ध होने के बावजूद आरोपियों की गिरफ्तारी न होने से साहू समाज में गहरा आक्रोश है। जिला साहू संघ, दुर्ग एवं भिलाई के पदाधिकारियों ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर स्पष्ट कहा है कि यदि शीघ्र और सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो समाज उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगा।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि
“यदि ड्यूटी पर खड़े पुलिसकर्मी का सम्मन सुरक्षित नहीं हैं, तो आम नागरिकों में कानून का भय कैसे बना रहेगा?”
मामले में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से जुड़े कुछ कार्यकर्ताओं के नाम सामने आने से राजनीतिक हलकों में भी हलचल तेज हो गई है। वहीं पुलिस प्रशासन का कहना है कि मामला दर्ज कर निष्पक्ष जांच की जा रही है और कानून के अनुसार कार्रवाई होगी।
यह पूरा घटनाक्रम एक बड़ा सवाल खड़ा करता है—
क्या कानून का पालन कराने वाला पुलिसकर्मी ही आज सबसे असुरक्षित है?
और क्या राजनीतिक विरोध की आड़ में वर्दी का अपमान अब सामान्य होता जा रहा है?
अब निगाहें पुलिस प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं, क्योंकि यह फैसला न केवल इस मामले का भविष्य तय करेगा, बल्कि पुलिस बल के मनोबल और समाज में कानून के सम्मान की दिशा भी तय करेगा।

