नई दिल्ली। भारत की करेंसी व्यवस्था में जल्द बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। केंद्र सरकार ने ₹10 और ₹20 के पॉलीमर बैंक नोटों के फील्ड ट्रायल को मंजूरी दे दी है। सरकार ने दोनों मूल्यवर्गों में एक-एक अरब यानी कुल 2 अरब पॉलीमर नोट जारी करने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी है। मंगलवार को संसद में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इसकी जानकारी दी।
आरबीआई के प्रस्ताव पर सरकार ने दी मंजूरी
राज्यसभा में एक लिखित जवाब में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के केंद्रीय निदेशक मंडल की सिफारिश के आधार पर आरबीआई अधिनियम, 1934 की धारा 25 के तहत केंद्र सरकार को यह प्रस्ताव भेजा गया था।
प्रस्ताव में फील्ड ट्रायल के सफल रहने के बाद ₹10 और ₹20 मूल्यवर्ग में पॉलीमर नोटों को नियमित रूप से जारी करने की योजना भी शामिल है। सरकार ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
आरबीआई के अनुसार, नए पॉलीमर नोटों को फिलहाल मौजूदा कागज आधारित नोटों के साथ समानांतर रूप से जारी करने का प्रस्ताव है। यानी शुरुआती दौर में दोनों तरह के नोट बाजार में चल सकते हैं।
क्या होते हैं पॉलीमर नोट?
पॉलीमर नोट सामान्य कॉटन आधारित कागज की जगह एक विशेष प्रकार के प्लास्टिक यानी पॉलीमर से बनाए जाते हैं। ये पारंपरिक कागजी नोटों की तुलना में अधिक टिकाऊ माने जाते हैं।
पॉलीमर नोट नमी, धूल और रोजमर्रा के इस्तेमाल से होने वाली घिसावट का बेहतर तरीके से सामना कर सकते हैं। दुनिया के कई देशों, जिनमें ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और ब्रिटेन शामिल हैं, में पहले से पॉलीमर करेंसी का इस्तेमाल किया जा रहा है।
ज्यादा टिकाऊ और सुरक्षा के लिहाज से भी खास
पॉलीमर नोटों की सबसे बड़ी खासियत उनकी लंबी उम्र मानी जाती है। कागजी नोटों की तुलना में इनके ज्यादा समय तक चलने से बार-बार नए नोट छापने की जरूरत कम हो सकती है।
इसके अलावा पॉलीमर नोटों में आधुनिक और उन्नत सुरक्षा फीचर्स शामिल करना भी आसान होता है। इससे नकली नोटों की समस्या पर अंकुश लगाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
अभी खरीद प्रक्रिया शुरुआती चरण में
वित्त मंत्री ने बताया कि आरबीआई की ओर से सरकार को सूचित किया गया है कि पॉलीमर नोटों के लिए जरूरी खरीद प्रक्रिया अभी शुरुआती चरण में है। ऐसे में फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि इन नोटों को आम जनता के बीच कब तक जारी किया जाएगा।
सरकार ने यह भी कहा है कि इस पूरी परियोजना पर आने वाली लागत के बारे में अभी कोई निश्चित जानकारी उपलब्ध नहीं है।
आरबीआई गवर्नर भी दे चुके हैं ट्रायल की जानकारी
इस महीने की शुरुआत में आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में पॉलीमर नोटों के पायलट प्रोजेक्ट की जानकारी दी थी।
उन्होंने बताया था कि पॉलीमर नोटों पर अभी परीक्षण चल रहा है और बाजार में उतारने से पहले इनकी पूरी तरह जांच की जाएगी। आरबीआई फील्ड ट्रायल के नतीजों का विस्तृत मूल्यांकन करने के बाद ही बड़े स्तर पर पॉलीमर नोटों को चलन में लाने पर अंतिम फैसला करेगा।
वित्त वर्ष 2027-28 तक प्रचलन में लाने का लक्ष्य
आरबीआई गवर्नर के अनुसार, केंद्रीय बैंक का लक्ष्य वित्त वर्ष 2027-28 तक पॉलीमर नोटों को प्रचलन में लाने का है। यदि फील्ड ट्रायल सफल रहता है और सभी जरूरी परीक्षण पूरे हो जाते हैं, तो भारत की करेंसी व्यवस्था में पॉलीमर नोटों की एंट्री एक महत्वपूर्ण बदलाव साबित हो सकती है।

