रायपुर। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में पाटन निर्वाचन क्षेत्र से उनकी जीत को चुनौती देने वाली चुनाव याचिका के मामले में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है। इसके साथ ही चुनाव याचिका की सुनवाई हाई कोर्ट में जारी रहने का रास्ता साफ हो गया है।
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि मामले का अंतिम फैसला साक्ष्यों और सबूतों के आधार पर होगा। अदालत यह भी देखेगी कि कथित आचार संहिता उल्लंघन का चुनाव परिणाम पर वास्तविक और महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ा था या नहीं।
विजय बघेल ने लगाया था आचार संहिता उल्लंघन का आरोप
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार विजय बघेल ने चुनाव याचिका दायर कर आरोप लगाया है कि मतदान से पहले लागू 48 घंटे की ‘साइलेंस पीरियड’ के दौरान भूपेश बघेल ने रोड शो किया था। याचिका में इसे जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 126 का उल्लंघन बताया गया है।
विजय बघेल की ओर से उठाए गए इन आरोपों के आधार पर चुनाव याचिका को हाई कोर्ट ने सुनवाई योग्य माना था। इसी निर्णय को भूपेश बघेल ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
कपिल सिब्बल ने दी ये दलील
भूपेश बघेल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट में दलील रखी। उन्होंने कहा कि आरोपों को सही मान भी लिया जाए तो कथित उल्लंघन जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 123 के तहत ‘भ्रष्ट आचरण’ नहीं बनता, बल्कि यह धारा 125 के तहत चुनावी अपराध की श्रेणी में आ सकता है।
सिब्बल ने यह भी तर्क दिया कि कथित उल्लंघन का चुनाव परिणाम पर कोई महत्वपूर्ण प्रभाव नहीं पड़ा, क्योंकि भूपेश बघेल ने अपने प्रतिद्वंद्वी को करीब 20 हजार वोटों के अंतर से चुनाव में हराया था। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से मामले में हस्तक्षेप करने का आग्रह किया।
हालांकि, शीर्ष अदालत ने इन दलीलों पर इस स्तर पर राहत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि भूपेश बघेल अपने सभी कानूनी तर्क हाई कोर्ट के समक्ष होने वाली सुनवाई के दौरान रख सकते हैं।
हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में दी थी चुनौती
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने भूपेश बघेल को चुनाव याचिका की maintainability को छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में चुनौती देने की अनुमति दी थी। इसके बाद उन्होंने हाई कोर्ट में आवेदन दाखिल किया था।
15 जून को हाई कोर्ट ने उनके आवेदन को खारिज करते हुए चुनाव याचिका को सुनवाई के योग्य माना था। इसी आदेश के खिलाफ भूपेश बघेल ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।
अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा हाई कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप से इनकार किए जाने के बाद पाटन विधानसभा चुनाव से जुड़ी चुनाव याचिका पर हाई कोर्ट में सुनवाई आगे भी जारी रहेगी। मामले का अंतिम फैसला उपलब्ध साक्ष्यों और कानूनी दलीलों के आधार पर किया जाएगा।

