नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित साइबर खतरों से निपटने के लिए देश के साइबर सुरक्षा ढांचे को और मजबूत किया है। सरकार के मुताबिक, AI तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के कारण स्वचालित साइबर हमले, पहचान संबंधी धोखाधड़ी, बहुभाषी फिशिंग और सिस्टम की कमजोरियों का तेजी से फायदा उठाने जैसे खतरे बढ़े हैं। इन चुनौतियों से निपटने के लिए कानूनी, तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं।
सरकार ने बताया कि इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) ने AI आधारित सिस्टम तैनात किए हैं, जो फिशिंग गतिविधियों और दुर्भावनापूर्ण वेबसाइटों की पहचान कर समय रहते आवश्यक कार्रवाई करते हैं। इसके अलावा, सार्वजनिक डिजिटल परिसंपत्तियों की सुरक्षा के लिए AI आधारित वल्नरेबिलिटी असेसमेंट और साइबर थ्रेट इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म भी विकसित किए गए हैं, जिससे विभिन्न संस्थानों को समय पर अलर्ट मिल सके।
जून और जुलाई 2026 के दौरान CERT-In ने “फ्रंटियर AI आधारित साइबर खतरों के खिलाफ लचीलापन विकसित करना” विषय पर 10 विशेष साइबर सुरक्षा अभ्यास और ड्रिल आयोजित किए। इन कार्यक्रमों में 345 सरकारी और निजी संगठनों के 1,470 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। इनमें बिजली, दूरसंचार, बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं, परिवहन, शिक्षा, स्वास्थ्य और अंतरिक्ष क्षेत्र से जुड़े संस्थान शामिल थे।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों को AI सुरक्षा के क्षेत्र में प्रशिक्षित करने के लिए सरकार ने Certified Security Professional in Artificial Intelligence (CSPAI) कार्यक्रम भी शुरू किया है। इसके साथ ही CERT-In, उद्योग जगत के सहयोग से नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन कर सरकारी और निजी क्षेत्र के साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कौशल विकास कर रहा है।
सरकार ने AI आधारित साइबर खतरों से बचाव के लिए कई दिशा-निर्देश और परामर्श भी जारी किए हैं। इनमें AI-सहायता प्राप्त सुरक्षा परीक्षण, सतत निगरानी, पैच प्रबंधन, डिजिटल अवसंरचना की सुरक्षा, जनरेटिव AI के सुरक्षित उपयोग, स्मार्ट सिटी साइबर सुरक्षा, डीपफेक से बचाव और सप्लाई चेन सुरक्षा से जुड़े दिशा-निर्देश शामिल हैं।
सरकार का कहना है कि इन पहलों का मुख्य उद्देश्य देश में सुरक्षित, भरोसेमंद और मजबूत डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना तथा AI आधारित साइबर खतरों के खिलाफ भारत की साइबर सुरक्षा क्षमता को और सशक्त बनाना है।

