स्मार्टफोन की एक चूक, जीवनभर की कमाई पर ‘डिजिटल डकैती’एपीके फाइल और डिजिटल अरेस्ट बन रहे साइबर ठगी के बड़े हथियार

भिलाई। डिजिटल तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर अपराध के मामले भी लगातार बढ़ रहे हैं। स्मार्टफोन पर आने वाले अनजान लिंक, फर्जी एपीके फाइल और डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठग लोगों की मेहनत की कमाई को निशाना बना रहे हैं। थोड़ी सी लापरवाही लोगों को आर्थिक नुकसान पहुंचा सकती है।समाचार रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी से अक्टूबर 2026 तक दुर्ग जिले में ठगी की कुल 4,803 शिकायतें दर्ज की गईं। इन मामलों में लोगों से करीब 158.78 करोड़ रुपये की ठगी का उल्लेख किया गया है।

यह आंकड़ा साइबर अपराध के बढ़ते खतरे को दर्शाता है।ऐसे बिछाया जाता है ठगी का जालसाइबर ठग चालान, बैंक अपडेट, बिजली बिल और अन्य जरूरी सेवाओं के नाम पर लोगों को लिंक भेजते हैं। लिंक पर क्लिक करने या अनजान एपीके फाइल डाउनलोड करने से मोबाइल की जानकारी और निजी डेटा खतरे में पड़ सकता है।

वहीं, डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठग खुद को पुलिस या अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं। वे गिरफ्तारी का भय दिखाकर पैसे ट्रांसफर करने का दबाव बनाते हैं।सावधानी ही सबसे बड़ा बचावसाइबर ठगी से बचने के लिए अनजान लिंक पर क्लिक न करें, किसी अनजान स्रोत से एपीके फाइल डाउनलोड न करें और किसी के साथ ओटीपी, बैंकिंग पासवर्ड या गोपनीय जानकारी साझा न करें।

यदि कोई व्यक्ति पुलिस अधिकारी बनकर वीडियो कॉल पर डराए या पैसे की मांग करे, तो घबराने के बजाय संबंधित विभाग से आधिकारिक माध्यम से संपर्क करें।साइबर ठगी होने पर तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर संपर्क करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।अपील: जागरूक रहें, सतर्क रहें और अपनी मेहनत की कमाई को साइबर ठगों से सुरक्षित रखें।

nikettamrakar
nikettamrakar
Articles: 1352