कवर्धा – वर्तमान परिदृश्य में जिले के पशुपालक अपने गौवंशीय पशुओं को घर में न बांधते हुए स्वतंत्र विचरण हेतु छोड़ रहे है। फलतः ये पशु राष्ट्रीय / राज्य एवं स्थानीय मार्गों में विचरण करते है जो सड़क दुर्घटना का कारण बनता है। माननीय उच्च न्यायालय बिलासपुर में दर्ज प्रकरण के निर्देश के परिपालन में पशुपालकों के लापरवाही व गैर जिम्मेदाराना रवैये के कारण आवारा घुमंतु पशुओं से होने वाली गंभीर सड़क दुर्घटनाओं के कारण होने वाली जनहानि / पशु हानि एवं धन हानि को दृष्टिगत रखते हुए छ.ग. पंचायती राज अधिनियम 1993 की धारा 49 (16) एवं ( 22 ) के अंतर्गत संपूर्ण कबीरधाम जिला क्षेत्र के लिए यह आदेश पारित किया गया।
- जिले के सभी पशुपालकों को अपने पशुओं का पंजीय पंचायत स्तर पर किया जाना अनिवार्य होगा तथा पशु के जन्म, मृत्यु खरीदी विकी आदि की संसूचना 15 दिवस के अंदर संबंधित ग्राम पंचायत में पंजीबद्ध किया जाना अनिवार्य होगा।
- जिले के सभी पशुपालको को अपने पशुओं में पशु पहचान हेतु ईयर टैग लगवायें जाने की अनिवार्यता होगी, जिसके गुम होने, टुटने अथवा कट जाने पर पंचायत अथवा पशु चिकित्सा विभाग को सूचित कर 7 दिवस के भीतर नवीन इयर टैग लगवाया जाना अनिवार्य होगा।
- चरवाहे के बिना पशुओं को चारागाह हेतु छोड़ना पूर्णतः प्रतिबंधित होगा।
- जिले में लगने वाले समस्त पशु बाजारों में पशुओं की खरीदी बिक्री हेतु ईयर टैग अनिवार्य होगा, कोई भी व्यापारी बिना पंजीयन एवं ईयर टैग के पशु की खरीदी बिक्री नहीं कर सकेगा।
- पशु बाजारों में पशुओं की खरीदी बिक्री की संपूर्ण जानकारी ईयर टैग सहित पंजीबद्ध कर संबंधित पंचायत एवं पशु चिकित्सा विभाग को उपलब्ध कराया जाना अनिवार्य होगा।
जान लिजिये – गायो को खुला छोड़ने अथवा नियमों की अवहेलना किये जाने पर भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 291, पशु कुरता अधिनियम 1960 की धारा 11 (1) पशु अतिचार अधिनियम 1871 एवं अन्य सुसंगत प्रावधानों के अंतर्गत कठार वैधानिक कार्यवाही की जावेगी।

