देवकर। छत्तीसगढ़ की माटी में रची-बसी लोकपरंपराएं आपसी प्रेम, अपनत्व और सामाजिक जुड़ाव का संदेश देती हैं। इन्हीं परंपराओं में नेवता भोजन का भी विशेष महत्व है। इसी परंपरा का निर्वहन करते हुए ग्राम हाथीडोब निवासी स्वर्गीय सरोज वर्मा, पिता कंसराम वर्मा, उम्र 38 वर्ष के दशगात्र कार्यक्रम के अवसर पर बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 को उनके परिवार द्वारा शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला हाथीडोब के बच्चों को नेवता भोजन कराया गया।
दुःख की इस घड़ी में परिवार ने बच्चों को अपनेपन के साथ भोजन कराकर स्थानीय रीति-रिवाजों और सामाजिक परंपराओं के प्रति अपनी आस्था प्रकट की। नेवता भोजन में बच्चों को चावल, दाल, पूड़ी, कढ़ी, आलू-चना की सब्जी और लड्डू परोसे गए। बच्चों ने आत्मीयता के साथ भोजन ग्रहण किया। इस आयोजन में छत्तीसगढ़ की उस लोकभावना की झलक दिखाई दी, जिसमें सुख-दुःख के अवसरों पर समाज और नई पीढ़ी के साथ जुड़ाव बनाए रखने की परंपरा रही है।
इस अवसर पर संकुल समन्वयक श्री मन्नू लाल साहू ने नेवता भोजन की परंपरा को सामाजिक सद्भाव और आत्मीयता का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि ऐसी परंपराएं हमारी सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रखती हैं और बच्चों को अपनी लोकसंस्कृति से जोड़ती हैं।
प्रधान पाठक श्री टेकराम बांधे एवं शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला हाथीडोब परिवार ने स्वर्गीय सरोज वर्मा को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए ईश्वर से प्रार्थना की कि दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें तथा शोकसंतप्त परिवार को इस अपार दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें।


