नई दिल्ली। भारत में डेटा सेंटर उद्योग के विस्तार के बीच तेलंगाना, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश प्रमुख राज्यों के रूप में उभर रहे हैं। इन राज्यों में अनुकूल नीतियों, बेहतर बुनियादी ढांचे और सरकारी प्रोत्साहन के चलते डेटा सेंटर से जुड़े निवेश की संभावनाएं बढ़ी हैं।
साख निर्धारण एजेंसी एसएंडपी ग्लोबल की रिपोर्ट के अनुसार, डेटा सेंटर नीति के मामले में इन राज्यों को मजबूत सरकारी समर्थन मिला है। बिजली की उपलब्धता, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और निवेश को प्रोत्साहित करने वाली नीतियां इनके लिए महत्वपूर्ण आधार बन रही हैं।
डेटा सेंटर की बढ़ती जरूरत के साथ देश में बिजली आपूर्ति, डिजिटल नेटवर्क और आधुनिक तकनीक से जुड़े बुनियादी ढांचे के विकास को भी गति मिल रही है। क्लाउड कंप्यूटिंग, ऑनलाइन सेवाओं और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते इस्तेमाल से डेटा स्टोरेज और प्रोसेसिंग की मांग लगातार बढ़ रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले वर्षों में एआई और डिजिटल सेवाओं के विस्तार के साथ डेटा सेंटर की जरूरत और बढ़ सकती है। ऐसे में जिन राज्यों में बिजली, भूमि, कनेक्टिविटी और सरकारी नीतियों का बेहतर तालमेल होगा, वहां इस क्षेत्र में नए निवेश की संभावनाएं मजबूत हो सकती हैं।


