पितृ पक्ष में पीपल के 21 पत्तों पर लिखें ‘श्रीराम’, हनुमान जी को करें अर्पित; जानें इस पारंपरिक उपाय की मान्यता

धर्म डेस्क, । पितृ पक्ष को हिंदू धर्म में पूर्वजों के स्मरण और उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करने की अवधि माना जाता है। इस दौरान परिवारों में श्राद्ध, तर्पण और प्रार्थना जैसे धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। पितृ पक्ष से जुड़ी कई पारंपरिक मान्यताओं में पीपल के पेड़ की पूजा का भी विशेष महत्व बताया गया है।

इन्हीं प्रचलित मान्यताओं में पीपल के 21 पत्तों पर ‘श्रीराम’ लिखकर हनुमान जी को अर्पित करने की परंपरा भी शामिल है। मान्यता के अनुसार, श्रद्धालु इस दौरान अपने पूर्वजों का स्मरण करते हुए पूजा-पाठ और प्रार्थना करते हैं।

21 पीपल के पत्तों पर लिखें ‘श्रीराम’

प्रचलित धार्मिक मान्यता के अनुसार, पितृ पक्ष के दौरान पीपल के 21 पत्ते लेकर प्रत्येक पत्ते पर ‘श्रीराम’ लिखा जाता है। इसके बाद इन पत्तों की माला तैयार कर हनुमान जी को श्रद्धापूर्वक अर्पित किया जाता है। भक्त इस दौरान भगवान राम का स्मरण और हनुमान जी की पूजा करते हैं।

हालांकि, 21 पत्तों और इस विधि से जुड़ी मान्यताएं धार्मिक परंपराओं पर आधारित हैं, जिन्हें अलग-अलग परिवार और समुदाय अपने-अपने रीति-रिवाजों के अनुसार करते हैं।

मंगलवार या शनिवार को करना माना जाता है शुभ

इस पारंपरिक उपाय के लिए मंगलवार और शनिवार का दिन विशेष माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं में दोनों दिन हनुमान जी की पूजा से जुड़े हैं। शनिवार का संबंध शनि देव की पूजा और पीपल से जुड़ी कई परंपराओं से भी माना जाता है।

श्रद्धालु अपनी पारिवारिक परंपरा और धार्मिक मान्यता के अनुसार इन दिनों पूजा कर सकते हैं।

पीपल की जड़ में चढ़ाएं जल

पीपल की पारंपरिक पूजा में उसकी जड़ों में जल अर्पित करने की भी मान्यता है। श्रद्धालु पीपल के पेड़ के पास जल चढ़ाकर दीपक जला सकते हैं और कुछ समय शांत मन से प्रार्थना कर सकते हैं। पितृ पक्ष में कई लोग इस दौरान अपने पूर्वजों का स्मरण भी करते हैं।

सात बार करें परिक्रमा

कुछ धार्मिक परंपराओं में पीपल के पेड़ की सात बार परिक्रमा करने की मान्यता भी बताई गई है। परिक्रमा के दौरान पूर्वजों का स्मरण करते हुए ‘ॐ पितृदेवाय नमः’ का जाप करने की परंपरा कुछ स्थानों पर प्रचलित है।

पितृ पक्ष के अनुष्ठानों में सबसे महत्वपूर्ण श्रद्धा और पूर्वजों का स्मरण माना जाता है। ऐसे में किसी भी धार्मिक उपाय को अपनी परिवार की परंपरा और स्थानीय मान्यताओं के अनुसार करना उचित माना जाता है।

अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। इसे अंतिम सत्य या वैज्ञानिक प्रमाण के रूप में न लें। किसी भी धार्मिक परंपरा का पालन स्थानीय मान्यता और अपने विवेक के अनुसार करें।

nikettamrakar
nikettamrakar
Articles: 1325