बिलासपुर, 28 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के सीपत क्षेत्र के झलमला गांव में बनाए गए अस्थाई गौठान में पिछले दो दिनों के दौरान करीब 30 मवेशियों की मौत का मामला सामने आया है। ग्रामीणों ने गौठान में अव्यवस्था का आरोप लगाते हुए कहा है कि यहां करीब 300 मवेशियों को पर्याप्त चारा, पानी और बारिश से बचाव की व्यवस्था के बिना रखा गया था।
ग्रामीणों के मुताबिक, खुले मैदान में बनाए गए गौठान में लगातार बारिश के कारण कीचड़ की स्थिति बन गई है। मवेशियों के लिए पर्याप्त शेड भी उपलब्ध नहीं है। ग्रामीणों का आरोप है कि मनरेगा के तहत पैरा तो एकत्र कराया गया था, लेकिन मवेशियों को नियमित रूप से चारा उपलब्ध नहीं कराया जा रहा था।
शवों को दफनाने और नाले में बहाने का आरोप
ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि मवेशियों की मौत की जानकारी बाहर न आए, इसके लिए जेसीबी से गड्ढे खुदवाकर कुछ शवों को दफना दिया गया। वहीं कुछ शवों को नाले के पानी में बहाने और अन्य स्थानों पर फेंकने का भी आरोप लगाया गया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
दो महीने पहले तैयार किया गया था अस्थाई गौठान
जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत झलमला के सरपंच धनलाल साहू ने करीब दो महीने पहले ग्रामीणों की सहमति से खुले मैदान में फेंसिंग तार लगाकर अस्थाई गौठान तैयार कराया था। इसके बाद आसपास के खेतों में घूमने वाले मवेशियों को पकड़कर गौठान में रखा जाने लगा।
सरपंच ने बारिश और ठंड को बताया मौत की वजह
वहीं ग्राम पंचायत झलमला के सरपंच धनलाल साहू ने ग्रामीणों के आरोपों से अलग मवेशियों की मौत के पीछे भारी बारिश और ठंड को वजह बताया है। उनका कहना है कि कुछ मवेशी पहले से ही बीमार थे। कुछ दिन पहले सीपत से पशु चिकित्सकों की टीम भी पहुंची थी, जिसने बीमार मवेशियों का इलाज किया था।
फिलहाल मवेशियों की मौत की वास्तविक संख्या और मौत के कारणों की स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। प्रशासन की जांच और पशु चिकित्सा विभाग की रिपोर्ट के बाद मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।


