अंडा/डगनिया। खरीफ सीजन में धान की फसल को लेकर दुर्ग ग्रामीण क्षेत्र के किसानों की चिंता बढ़ती जा रही है। कई खेतों में धान की पत्तियों का रंग पीला पड़ने और फसल की सामान्य बढ़वार प्रभावित होने की शिकायत सामने आई है। कुछ किसानों ने फसल में खैरा जैसे लक्षण बताए हैं, जबकि कुछ ने टुंग्रो वायरस की आशंका जताई है।
किसानों के अनुसार, धान की फसल में माहू का प्रकोप भी देखने को मिल रहा है। कीट और फसल में दिखाई दे रहे पीलापन से बचाव के लिए किसान अलग-अलग कृषि दवाइयों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके बावजूद कई खेतों में अपेक्षित सुधार नहीं होने से किसानों की परेशानी बढ़ गई है।
सही बीमारी की पहचान नहीं होने से बढ़ रहा खर्च
फसल को बचाने के लिए किसान लगातार दवाइयों का छिड़काव कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि अलग-अलग उत्पादों के इस्तेमाल के बाद भी समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हो रही है। इससे खेती की लागत बढ़ने के साथ फसल की पैदावार को लेकर भी चिंता बनी हुई है।
किसानों का कहना है कि धान में पीलापन केवल एक बीमारी की वजह से नहीं, बल्कि पोषक तत्वों की कमी, कीट या अन्य कारणों से भी हो सकता है। ऐसे में बिना जांच के दवाइयों का प्रयोग करने से उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
कृषि विशेषज्ञों से जांच की मांग
ग्रामीण क्षेत्र के किसानों ने कृषि विभाग से प्रभावित खेतों का निरीक्षण कराने की मांग की है। किसानों का कहना है कि विशेषज्ञ मौके पर पहुंचकर फसल की स्थिति की जांच करें और पीलापन व कीट प्रकोप का वास्तविक कारण स्पष्ट करें।
किसानों ने मांग की है कि जांच के बाद उन्हें बीमारी और कीट के अनुसार उचित दवा एवं उपचार की वैज्ञानिक जानकारी उपलब्ध कराई जाए। किसानों को उम्मीद है कि समय रहते फसल की समस्या की पहचान होने से संभावित नुकसान को कम किया जा सकेगा।


