रायपुर। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी पीएम सूर्य घर योजना के तहत सोलर पैनल लगवाने वाले कई उपभोक्ता इन दिनों परेशानी का सामना कर रहे हैं। उपभोक्ताओं का आरोप है कि सोलर सिस्टम स्थापित होने के बावजूद उन्हें बिजली का बिल भी भरना पड़ रहा है और सोलर पैनल के लिए लिए गए बैंक ऋण की मासिक किस्त (ईएमआई) भी चुकानी पड़ रही है।
उपभोक्ताओं का कहना है कि योजना से उन्हें बिजली खर्च में राहत मिलने और बचत होने की उम्मीद थी, लेकिन इसके विपरीत अब उन पर बिजली बिल और बैंक ईएमआई का दोहरा आर्थिक बोझ पड़ रहा है। उनका आरोप है कि कई बार शिकायत दर्ज कराने के बावजूद अब तक संतोषजनक समाधान नहीं मिल पाया है।
कुछ उपभोक्ताओं का कहना है कि उन्हें यह स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई कि सोलर पैनल लगने के बाद बिजली बिल किस आधार पर आएगा और नेट मीटरिंग या बिजली समायोजन की प्रक्रिया कैसे काम करेगी। इससे भ्रम और असंतोष की स्थिति बनी हुई है।


वहीं, बिजली विभाग का कहना है कि उपभोक्ताओं की शिकायतों की जानकारी ली जा रही है। विभाग के अनुसार, प्रत्येक मामले की जांच कर तकनीकी या प्रक्रियागत समस्याओं का जल्द समाधान किया जाएगा, ताकि योजना का लाभ पात्र उपभोक्ताओं तक सही तरीके से पहुंच सके।
गौरतलब है कि पीएम सूर्य घर योजना का उद्देश्य घरों की छतों पर सोलर पैनल लगाकर बिजली उत्पादन को बढ़ावा देना और उपभोक्ताओं के बिजली खर्च को कम करना है। ऐसे में योजना से जुड़ी बढ़ती शिकायतों ने इसके क्रियान्वयन और लाभ वितरण को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

