केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू का इस्तीफा मंजूर, संवैधानिक प्रावधान के तहत छोड़ा पद

नई दिल्ली। केंद्रीय रेल राज्य मंत्री एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने शुक्रवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया। रवनीत सिंह बिट्टू पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के पोते हैं और भारतीय जनता पार्टी से राज्यसभा सांसद रहे हैं।

जानकारी के अनुसार, रवनीत सिंह बिट्टू का इस्तीफा किसी राजनीतिक विवाद के कारण नहीं, बल्कि संवैधानिक प्रावधानों के तहत हुआ है। उनका राज्यसभा कार्यकाल जून 2026 में समाप्त हो गया था और उन्हें दोबारा उच्च सदन के लिए नामित नहीं किया गया। संसद की सदस्यता समाप्त होने के बाद उनके लिए मंत्री पद पर बने रहना संभव नहीं था।

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 75(2) के अनुसार राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की सलाह पर मंत्रियों की नियुक्ति और इस्तीफा स्वीकार करते हैं। वहीं संविधान में यह भी प्रावधान है कि यदि कोई व्यक्ति संसद का सदस्य नहीं है, तो वह अधिकतम छह महीने तक ही मंत्री रह सकता है। इसके बाद उसे संसद का सदस्य बनना अनिवार्य होता है, अन्यथा मंत्री पद छोड़ना पड़ता है। इसी संवैधानिक व्यवस्था के तहत बिट्टू का इस्तीफा स्वीकार किया गया।

रवनीत सिंह बिट्टू वर्ष 2024 में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए थे। इसके बाद केंद्र सरकार के तीसरे कार्यकाल में उन्हें रेल राज्य मंत्री और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री का दायित्व सौंपा गया। लोकसभा चुनाव में हार के बाद वह राज्यसभा के माध्यम से संसद पहुंचे और केंद्रीय मंत्रिपरिषद का हिस्सा बने।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मंत्री पद से मुक्त होने के बाद रवनीत सिंह बिट्टू अब पंजाब की राजनीति पर अधिक सक्रियता से ध्यान केंद्रित कर सकते हैं। अगले वर्ष प्रस्तावित पंजाब विधानसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा राज्य में संगठन को मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है। ऐसे में पार्टी उन्हें चुनावी अभियान और संगठन विस्तार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंप सकती है।

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