रायपुर। छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को विश्व पटल पर नई पहचान दिलाने वाली प्रसिद्ध पंडवानी गायिका पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई का रविवार को 70 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उन्होंने रायपुर स्थित एम्स अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से पूरे प्रदेश सहित कला जगत में शोक की लहर दौड़ गई।
डॉ. तीजन बाई ने अपनी अनूठी पंडवानी गायन शैली के माध्यम से न केवल भारत, बल्कि दुनिया के 17 देशों में छत्तीसगढ़ की लोककला का गौरव बढ़ाया। अपनी दमदार प्रस्तुति और विशिष्ट अभिनय शैली के कारण उन्होंने पंडवानी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई।
लोककला के क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री, पद्मभूषण और देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण सहित अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया गया था।
‘जानाबाई’ के नाम से भी लोकप्रिय डॉ. तीजन बाई का निधन छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति के लिए अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। उनके जाने से प्रदेश ने अपनी एक अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर खो दी है। कला प्रेमी, साहित्यकार, जनप्रतिनिधि और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है।

