धमधा में पंडित कृष्ण नंदन शर्मा ‘देवकर वाले’ की कथा ने श्रोताओं को किया भाव-विभोर
धमधा – धर्म और संस्कृति के केंद्र धमधा में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का आज सफल और भावपूर्ण समापन हुआ। राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कथा व्यास पंडित कृष्ण नंदन शर्मा ‘देवकर वाले’ ने व्यासपीठ से अंतिम दिवस भगवान श्रीकृष्ण और उनके परम मित्र सुदामा के चरित्र का गुणगान किया, जिसने श्रोताओं को गहन भक्ति और वैराग्य की ओर प्रेरित किया।
सुदामा-कृष्ण मिलन: त्याग और सच्ची मैत्री का संदेश
कथा के समापन दिवस पर, पंडित शर्मा जी ने सुदामा चरित्र के उस मार्मिक प्रसंग का वर्णन किया जब दरिद्र सुदामा संकोचवश अपनी पत्नी द्वारा दिए गए तंदुल (चावल) लेकर द्वारकाधीश श्रीकृष्ण से मिलने पहुँचे।
पंडित जी ने अपनी वाणी में कहा, “जग में पद, प्रतिष्ठा और संपत्ति क्षणभंगुर हैं, लेकिन सुदामा-कृष्ण की मित्रता शाश्वत है। इस मित्रता ने सिद्ध किया कि मित्रता में वैभव नहीं, केवल निश्छल प्रेम देखा जाता है।” उन्होंने जोर देकर कहा कि भगवान ने सुदामा के चरणों को धोकर और उनका आदर करके यह संदेश दिया कि सच्चा प्रेम सबसे बड़ा धन है।
जनसैलाब और व्यासपीठ का सम्मान
सात दिनों तक चली इस कथा में प्रतिदिन हजारों की संख्या में धर्मप्रेमी बंधु-भगिनियों ने भाग लिया। कथा के दौरान पंडित जी के ओजस्वी प्रवचनों, मधुर भजनों और सरस दृष्टांतों ने धामधा के वातावरण को भक्तिमय बनाए रखा।
कथा की पूर्णाहुति पर, यजमानों और आयोजक समिति ने व्यासपीठ का विधिवत पूजन किया और पंडित कृष्ण नंदन शर्मा ‘देवकर वाले’ को सादर सम्मानित कर उनका आशीर्वाद लिया। कथा के सफल आयोजन से क्षेत्र में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हुआ।
पंडित जी ने सभी श्रोताओं के प्रति आभार व्यक्त किया और उन्हें कथासार को जीवन में उतारने की प्रेरणा दी।

