धमधा टावर विवाद भड़का, 150+ किसान संकट में,6 दिन बाद भी कोई कार्यवाही नहीं
धमधा ब्लॉक के गोबरा पेंड्री समेत आसपास के पूरे क्षेत्र में टावर निर्माण को लेकर हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। किसानों ने आरोप लगाया है कि CSPTCL के अधीन काम कर रही यूनिक स्ट्रक्चर एंड टॉवर लिमिटेड बिना नोटिस और बिना मुआवज़ा दिए खेतों में घुसकर खड़ी फसल रौंद रही है, और टावर जबरन खड़े किए जा रहे हैं। किसानों के अनुसार कंपनी के कर्मचारी “ऊपर का आदेश”, “यह सरकारी काम है” और “पुलिस प्रशासन साथ है” कहकर डराने-धमकाने की हरकतें कर रहे हैं। इससे भी गंभीर बात पत्रकारों की जांच में सामने आई—कि पूरे धमधा ब्लॉक में 150 से अधिक किसान प्रभावित हुए हैं, लेकिन एक भी किसान को नींव, फसल क्षति या तार खिंचाई से होने वाले भविष्य के नुकसान का एक रुपया तक नहीं मिला। कई किसानों ने बताया कि उनसे दबावपूर्वक हस्ताक्षर करवाए गए, जिन्हें बाद में मंजूरी बताकर टावर लगा दिए गए। दूसरी तरफ, किसानों की शिकायतों के बावजूद कलेक्टर द्वारा चार दिनों से कोई कार्रवाई न होने, न निरीक्षण और न सर्वे भेजे जाने पर लोगों में गहरा असंतोष है। किसानों का कहना है कि प्रशासन उनकी सुनने के बजाय कंपनी के पक्ष में खड़ा दिखाई दे रहा है। पत्रकार संघ अध्यक्ष निकेत ताम्रकार ने भी इस मामले को बेहद गंभीर बताते हुए कहा है कि पूरी घटना की उच्च स्तरीय जांच आवश्यक है, और किसानों को उनका वास्तविक हक न मिला तो पूरा किसान समुदाय सड़क पर उतरने को विवश होगा। किसानों के लिए यह सिर्फ टावर लगाने का मामला नहीं, बल्कि खेत-बाड़ी बचाने की लड़ाई बन चुकी है। पूरे ब्लॉक में धन की फसल की शुरुवात में ही कंपनी द्वारा फसलों को रौंद दिया गया था जिसका आज भी फसल उत्पादन में आकलन किया जाए तो 40 से 50 कट्टा धान होना था जो कि टावर कंपनी के कार्यों के चलते उनके द्वारा रौंदा गया। जिसका आज तक मुवावजा का आता पता नहीं है।
मुख्य बिंदु –
1. कंपनी की मनमानी और फसल को नुकसान
बिना नोटिस और बिना अनुमति खेतों में घुसना
40–50 कट्टा धान कुचलना
टमाटर, भिंडी, राहर, सेमी जैसी सब्ज़ियाँ बर्बाद
2. दबावपूर्वक हस्ताक्षर करवाने के आरोप
“ऊपर का आदेश है” कहकर मजबूर करना
पुलिस का नाम लेकर डराना
साइन को बाद में मंजूरी बताकर टावर लगा देना
3. पत्रकारों की पड़ताल में खुलासा
पूरे धमधा ब्लॉक में 150+ किसान प्रभावित
किसी को भी मुआवज़े का एक रुपया तक नहीं मिला
नींव, फसल नुकसान और तार खिंचाई—सभी का भुगतान लंबित
4. प्रशासन पर सवाल
किसानों की कई शिकायतों के बाद भी कलेक्टर की चुप्पी
न निरीक्षण, न सर्वे, न कोई टीम
किसानों में धारणा—“कलेक्टर कंपनी के लिए मेहरबान”

5. तहसील स्तर पर न्यूनतम दरों का खेल
प्राकृतिक आपदा वाली न्यूनतम दर से मूल्यांकन
वास्तविक लागत का आधा भी नहीं निकल रहा
6. पत्रकार संघ का बयान
पत्रकार संघ अध्यक्ष निकेत ताम्रकार की मांग—
उच्च स्तरीय जांच अनिवार्य अन्यथा किसान सड़क पर उतरने को मजबूर होंगे
7. किसानों की प्रमुख मांग
नुकसान का वास्तविक लागत आधारित मुआवज़ा
भुगतान होने तक टावर कार्य रोकना
निष्पक्ष टीम से सर्वे
दबंगई करने वाले कर्मचारियों पर कार्रवाई

